खास तीन कर्मचारियों के हवाले थी काउंसिल
विजिलेंस जांच से काउंसिल के कई और कर्मचारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। आरोप है कि प्रधानधनेश अदलखा और उप प्रधान सोहनलाल कंसल ने अपने खास जानकारों को कार्यालयों में रखा हुआ था। काउंसिल में पूरा काम इन्हीं विश्वसनीय कर्मचारियों को दिया जाता था। पत्राचार से लेकर पंजीकरण तक का काम इन तीन कर्मचारियों के पास था।
इनमें से एक कर्मचारी कंसल की रिश्तेदार है तो दूसरे को रिटायरमेंट के बाद रखा गया है। इसके अलावा, एक महिला को भी प्राइवेट तौर पर काउंसिल में रखा गया था। ये कर्मचारी ही सारे दस्तावेज तीनों अधिकारियों को व्हाट्सएप करते थे। सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस सीसीटीवी फुटेज के साथ साथ कुछ कर्मचारियों की कॉल डिटेल खंगाल रही है। साथ ही कंसल के मोबाइल पर भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पहले डील, फिर निपटाते थे फाइल
विजिलेंस जांच में सामने आया है कि पंजीकरण के लिए पहले दलालों या फिर आवेदनकर्ता से डील की जाती थी, इसके बाद ही फाइल पर हस्ताक्षर होते थे। सप्ताह में एक दिन आकर फाइलों को निपटाया जाता था। आरोप है कि बिना सोहनलाल कंसल के हस्ताक्षर के फाइल नहीं निकलती थी। पैसे आने के बाद ही पंजीकरण सर्टिफिकेट जारी किया जाता था। अब विजिलेंस उन अभ्यर्थियों से पूछताछ की कोशिश करेगी, जिनसे पैसे लेकर सर्टिफिकेट दिए गए। विजिलेंस प्रधान अदलखा, रजिस्ट्रार वर्मा की तलाश में जुटी हुई है।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और रजिस्ट्रार को बर्खास्त करने की मांग
काउंसिल के पूर्व प्रधान केसी गोयल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि घोटाले की जांच को अध्यक्ष धनेश अदलखा प्रभावित कर रहे हैं। वह मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर के नाम का दुरुपयोग कर अधिकारियों को धमकाते हैं।
गोयल ने प्रधान अदलखा, उप प्रधान सोहनलाल कांसल और रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है। साथ ही सरकार से फार्मेसी काउंसिल कार्यालय को कब्जे में लेने की भी मांग की है। आईएएस स्तर के किसी अधिकारी को इसकी देखरेख दी जानी चाहिए, जिसका फार्मेसी काउंसिल से कोई लेना-देना ना हो।