पंजाब में मंडियों के ट्रांसपोर्ट टेंडर घोटाले की जांच में जुटी विजिलेंस के हाथ महत्वपूर्ण तथ्य लगे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग का डिप्टी डायरेक्टर आरके सिंगला छह अन्य मामलों में 100 करोड़ का चूना लगाकर कनाडा भाग गया और सरकार देखती रह गई। विजिलेंस ब्यूरो के पास पुख्ता जानकारी, सबूत और गवाह हैं कि सिंगला के सिर पर पूर्व कांग्रेसी मंत्री भारत भूषण आशु का हाथ था। आशु ने करोड़ों के घोटाले में चल रही जांच की फाइलों को न केवल बंद कराया बल्कि क्लीन चिट देकर उसे सेंट्रल विजिलेंस कमेटी का चेयरमैन बना दिया। दिलचस्प है कि जिस आईएएस अधिकारी ने छह केस में सिंगला के खिलाफ जांच के आदेश दिए, उसी आईएएस अधिकारी ने सभी केसों की फाइलें बंद कर दी।
11 अगस्त 2017 को रईया (अमृतसर) में गेहूं के आवंटन को लेकर आरके सिंगला को चार्जशीट किया गया। इसमें सिंगला ने 10 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। बंगा (नवांशहर) में 25 करोड़ के घोटाले में 15 मार्च 2017 को रूल 10 में सिंगला के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। तरनतारन में गेहूं खराब होने के मामले में एक अगस्त 2017 को सिंगला को जांच के दायरे में लाया गया, जिसमें 50 करोड़ का घोटाला था। चौथा केस कनाडा में पीआर लेने का था, जिसमें सिंगला ने विभाग को सूचित किए बिना पीआर हासिल कर ली। 22 सितंबर 2022 को उसे चार्जशीट किया गया। सिंगला जब जालंधर में जिला खाद्य आपूर्ति निरीक्षक थे तो उन्होंने आयकर विभाग की रिटर्न दाखिल नहीं की थी, जिस कारण चार्जशीट किया गया। छठा केस रिलीज आर्डर के बिना गेहूं सप्लाई का है, जिसमें सरकार को 61 लाख का चूना लगा था।
अधिकारियों के अनुसार, सिंगला का मामला 100 करोड़ से अधिक का हो सकता है। अभी जांच शुरू हुई है। छह मामलों में जांच व चार्जशीट का सामना करने वाले सिंगला के केसों को खत्म कर 22 जून 2018 को खाद्य आपूर्ति विभाग की सेंट्रल विजिलेंस कमेटी का चेयरमैन लगा दिया गया। इस फाइल को विजिलेंस खोजती रही, बाद में विजिलेंस ने सारे तथ्य एकत्रित कर लिए। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, भारत भूषण आशु की मेहरबानी से ही सिंगला को सीवीसी का चेयरमैन बनाया गया। उसके खिलाफ चल रही जांच बंद कराई गई।
जांच की भनक लगते ही भाग गया कनाडा
आरके सिंगला करोड़ों के टेंडर घोटाले का आरोपी है। जांच का पता चलते ही वह कनाडा भाग गया। आम आदमी पार्टी सरकार ने कुछ दिन पहले ही सिंगला को डिप्टी डायरेक्टर के पद से बर्खास्त किया था। उसने सेवा में रहते कनाडा की नागरिकता ली थी।
जांच जारी है, कुछ कहना जल्दबाजी होगी
एसएसपी विजिलेंस राजेश्वर सिंह ने कहा कि सारा मामला जांच के अधीन है, कुछ कहना जल्दबाजी होगी। अभी हमारी जांच चल रही है और इतना जरूर है कि यह बारीकी से की जा रही है। कसूरवार बख्शा नहीं जाएगा।