डेरा सच्चा सौदा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई जज बदलने की मांग के साथ ही गुरमीत राम रहीम के भविष्य पर भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हाईकोर्ट इस मांग पर अगले सप्ताह आदेश जारी करेगा और तब तक सीबीआई कोर्ट द्वारा इस मामले में अंतिम आदेश सुनाने पर रोक जारी रहेगी।
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याची जगसीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि जब 2002 में उसके पिता रंजीत सिंह की हत्या हुई थी तब वह आठ साल का था। इस मामले में आरोपी राम रहीम है, जिसके चलते केस लंबे समय तक चलता रहा। याची ने कहा कि इस मामले में जबसे सीबीआई के नए जज आएं हैं, तबसे सुनवाई को लगातार टाला जा रहा है।
कई बार सरकारी वकील भी सुनवाई को टालने की मांग कर देते हैं। याची ने कहा कि उसे लगता है कि इस मामले में एकतरफा फैसला सुनाया जा सकता है। यह भी बताया गया कि सीबीआई जज के खिलाफ एक अन्य मामले में भी आरोपियों के संपर्क में रहने की शिकायत मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई थी जो फिलहाल विचाराधीन है। ऐसे में इस केस को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की किसी अन्य सीबीआई अदालत में भेजी जाए।
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इस मांग और आरोपों पर सीबीआई जज द्वारा हाईकोर्ट में अपना हलफनामा सौंपा जा चुका है। सभी पक्ष अपनी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रख चुके हैं। सीबीआई कोर्ट को इस मामले में अंतिम फैसला सुनाना था, जिस पर हाईकोर्ट ने याचिका लंबित रहते रोक लगा दी थी। अब ऐसे में अगले सप्ताह इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर राम रहीम का भविष्य निर्भर होगा। सीबीआई भी इस मामले में अपना जवाब दायर कर कह चुकी है कि हाईकोर्ट चाहे तो कोर्ट बदल दे, हाईकोर्ट का फैसला उन्हें मंजूर होगा।