लोगों का कहना है कि पहले कभी टमाटर के दाम इस प्रकार एकदम से नहीं बढ़ थे। पिछले एक महीने से टमाटर के दाम लगातार अपने उच्चतम स्तर पर हैं। कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद से आम लोगों का जीवन एक तरफ जहां सामान्य होने लगा है, वहीं लोगों पर महंगाई की मार बढ़ती जा रही है।
स्कूल खुलने के बाद बच्चों के परिवहन का भार अभिभावकों पर पड़ा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए हर रोज सुबह सब्जी बनाना मजबूरी हो गया है लेकिन सब्जियों के दामों के कारण घर का खर्चा चला पाना मुश्किल हो रहा है। सब्जियों के दाम एक बार फिर आसमान छू रहे हैं।
इस प्रकार हैं सब्जियों के प्रतिकिलो दाम
- टमाटर 100-120 रुपये
- शिमला मिर्च 80-100 रुपये
- मटर 100-120 रुपये
- बींस 80-100 रुपये
- धनिया 150-200 रुपये
- हरी मिर्ची 100 रुपये
इस तरह पहली बार बढ़े दाम
सब्जियों के इस तरह लगातार बढ़ते हुए दाम परेशान करने वाले हैं। पहले कभी इतने दाम नहीं बड़े थे। घर का खर्चा चलाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है। सरकार को सब्जियों के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाना चाहिए। - संगीता सिंगला, स्थानीय निवासी।
बच्चे का स्कूल टिफिन पड़ रहा भारी
कोरोना महामारी के बाद अभी बच्चों के स्कूल भी खुल गए हैं। जिससे एकदम से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज का खर्चा बढ़ गया है। वहीं बच्चों के टिफिन के लिए हर रोज सब्जी बनाना भी मजबूरी है। टमाटर के बढ़ते दामों के कारण कोई भी सब्जी बनाने का खर्चा बहुत बढ़ गया है। - अनीता वर्मा, स्थानीय निवासी।
सब्जी से सस्ता पड़ रहा पनीर
हमारे घर में पहले हर रोज का रसोई का खर्चा तकरीबन 150-200 रुपये होता था। लेकिन यह खर्चा बढ़कर अब तकरीबन 350 से 400 रुपये तक हो गया है। कोई भी अच्छी सब्जी से सस्ता तो आज के समय में पनीर है। लेकिन पनीर को बनाने में भी टमाटर डालने पड़ते हैं। प्रशासन को इस तरफ अपना ध्यान देना चाहिए। - लाडी देवी, स्थानीय निवासी।
बेमौसम बरसात ने बढ़ाई लोगों की दिक्कत
पिछले दिनों बेमौसम की हुई बरसात के कारण टमाटर की काफी फसल खराब हो चुकी है। टमाटर की ज्यादातर सप्लाई मध्य प्रदेश, बेंगलुरु, महाराष्ट्र से आती थी। जो पीछे से नहीं आ पा रही थी। वहीं मटर और अन्य सब्जियों की जो पंजाब की फसल थी, वह भी बेमौसम की बरसात के कारण काफी हद तक नष्ट हो चुकी है। इन दिनों शादी-ब्याह ज्यादा होने के कारण मांग ज्यादा बढ़ी है। इस वजह से भी सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं। - संजय, सब्जी विक्रेता।