जस्सी तल्हन ने कहा कि पूर्व एजी सिद्धू ने समाज के बारे में अपशब्द कहे, वहीं कुछ लोग आरक्षण खत्म करने की बयानबाजी कर रहे हैं, ऐसे लोगों पर कार्रवाई तक संघर्ष नहीं रुकेगा। इधर, पुलिस के दोहरे चरित्र से दुकानदार परेशान दिखे, जो घंटों दुकानों के बाहर बैठे रहे कि शायद पुलिस सुरक्षा देगी और वह दुकानें खोल पाएंगे लेकिन पुलिस पल्ला झाड़ती नजर आई।
अधिकारी चौक-चौराहों पर खड़े जरूर थे। वह बेबस नजर आए, बंद की कॉल के बाद रोष मार्च निकाले गए, जिससे लोग जाम में फंसे लेकिन पुलिस ने न तो ट्रैफिक डायवर्ट का प्लान बनाया और न ही हालात से निपटने के लिए किसी तरह की तैयारी की। 15 अगस्त के लिए शहर अलर्ट पर है। सुरक्षा को लेकर कमिश्नरेट पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
19 अगस्त को मिलने का समय देना सिर्फ छलावा है
सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि 19 अगस्त को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मिलने का समय दिया है जो सिर्फ एक छलावा है, क्योंकि हमने मांगपत्र पहले ही भेज दिया था, अगर न्याय देना होता तो उस पर अमल करते। बंद की कॉल को देखते हुए सिर्फ खानापूर्ति करते हुए मिलने का समय दिया गया, ताकि सरकार चहेतों के बचा सके।
अमृतसर के संत का वाल्मीकि से कोई लेना-देना नहीं था, हमारा बंद सफल रहा
वाल्मीक समुदाय की नेताओं ने कहा कि गुरुवार देर शाम अमृतसर के एक संत ने बंद की कॉल वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन उनका समाज से कोई लेना देना नहीं था। हमने बंद की कॉल को सफल बनाने के लिए प्रयास किए और जालंधर पूर्ण तौर पर बंद रहा, जिसके लिए वह दुकानदारों का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उनकी समस्याओं को समझा। नेताओं की ओर से दुकानदारों को अंजाम भुगतने की धमकी वाले बयान पर कहा कि हम बाजारों में गए ही नहीं तो धमकी देने का सवाल कहां से आया, लोगों ने हमारा समर्थन किया यही कारण है कि शहर की सड़कें भी सुनसान दिखीं, कोई घरों से नहीं निकला।