गुरुग्राम के किसानों को मिलेगा प्रति एकड़ 2.67 करोड़ रुपये मुआवजा
हरियाणा के गुरुग्राम जिले की मानेसर तहसील के कासन, कुकरोला और सहरावन गांवों के किसानों को अधिग्रहित जमीन का प्रति एकड़ 2.67 करोड़ रुपये मुआवजा मिलेगा। सरकार ने औद्योगिक मॉडल टाउनशिप के विकास के लिए लगभग 1810 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। मामला कानूनी पचड़े में फंसने पर अब सरकार ने नो लिटिगेशन पॉलिसी -2022 बनाई है।
सरकार की नीति को किसान स्वीकार करते हैं, उन्हें पर्याप्त रूप से मुआवजा दिया जाएगा। किसान एक एकड़ भूमि के लिए कुल 1000 वर्ग मीटर के विकसित आवासीय या औद्योगिक भूखंड के लिए भी पात्र होंगे। पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता ने शून्यकाल में किसानों का मुद्दा उठाया था। उसके मद्देनजर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को नीति की घोषणा विधानसभा में की।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2010 के भूमि अधिग्रहण के मामले में निर्णय दिया था है कि मुआवजा उस समय के रेट के अनुसार ही दिया जाए, जो 92 लाख प्रति एकड़ बनता है। गुरुग्राम में क्लेक्टर रेट अधिक हैं और इतने सालों के बाद मुआवजा दिया जा रहा है तो यह महसूस किया गया कि उन्हें थोड़ी अधिक राशि मिलनी चाहिए।
कर्ज मामले पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को दिखाया आइना
विपक्ष के नेता भूपेंद्र हुड्डा द्वारा राज्य सरकार पर अधिक कर्ज होने पर मुख्यमंत्री ने आंकड़े पेश कर विपक्ष को आइना दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने कैग की 2021-22 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि राज्य पर 4,15,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। जबकि वास्तविकता यह है कि कैग की रिपोर्ट में 2021-22 में हरियाणा पर कर्ज की राशि 2,39,000 करोड़ रुपये दिखाई गई है।
हरियाणा सरकार की अकाउंट बुक्स में 2,27,697 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज है। अगर इस राशि का अंतर भी निकाला जाए तो केवल 12 हजार करोड़ रुपये की ही अंतर दिखता है, परंतु किसी भी लिहाज से राज्य पर 4,15,000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं है। वित्त विभाग के प्रभारी मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश की ऋण की स्थिति हमेशा सही बतानी चाहिए और सदन में रखे गए तथ्य सही होने चाहिए।
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। कोरोना काल के दौरान केंद्र सरकार ने कर्ज लेने की सीमा 4 प्रतिशत तक कर दी थी, जबकि हरियाणा सरकार तो इस सीमा को 2.99 प्रतिशत तक बनाए रखने में कामयाब है। कोरोना काल में केंद्र सरकार के मानदंडों के अनुसार हम 40,661 करोड़ रुपये ले सकते थे, जबकि हमने 30,000 करोड़ रुपये ऋण लिया। जबकि 2021-22 के दौरान 40,870 करोड़ रुपये का ऋण ले सकते थे लेकिन हमने 30,500 करोड़ रुपये ही लिया।