उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल आई प्राकृतिक आपदा में मारे गए हजारों लोगों के अवशेषों को उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए डीएनए डाटा बेस तैयार किया है। जून 2013 में आई इस आपदा में बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री और देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटक और श्रद्धालु काल का ग्रास बन गए थे।
उत्तराखंड सरकार के फोरेंसिक विभाग की ओर से आपदा के बाद मिले लावारिस शवों का डीएनए डाटा बेस तैयार किया है। सरकार चाहती है कि कम से कम मारे गए लोगों की पहचान हो सके और उनके अवशेष उनके परिजनों को सौंपे जा सके।
बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थ यात्री लापता
हादसे में हरियाणा से भी बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थ यात्री लापता हो गए थे। आपदा के बाद भारतीय सेना, उत्तराखंड सरकार, विभिन्न स्वयंसेवी और सरकारी संस्थाओं की ओर से चलाए गए राहत अभियानों में बड़ी संख्या में लोगों के शव मिले थे।
जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई थी, उन शवों का अंतिम संस्कार भी सरकार की ओर से किया गया, लेकिन उनके अवशेष अब भी उत्तराखंड में सुरक्षित रखे गए हैं।
इन अवशेषों को उनके वारिसों तक पहुंचाने के लिए फोरेंसिक विभाग ने डीएनए डाटा बेस तैयार किया है।
यहां पर करें फोन
हरियाणा के मुख्य सचिव को भेजी गई सूचना के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका कोई परिजन उत्तराखंड आपदा का ग्रास बना हो और उसका शव नहीं मिला हो, वह देहरादून स्थित फोरेंसिक विज्ञान लैबोरेटरी से संपर्क कर सकता है। फोरेंसिक विभाग का निदेशालय देहरादून में पंडितवारी पुलिस चौकी परिसर में स्थित है। यहां फोन नंबर 0135-2772090 पर संपर्क किया जा सकता है।
वर्जन
उत्तराखंड त्रासदी में भारी जनहानि हुई थी। अनेक को अपने परिजनों के अवशेष भी प्राप्त नहीं हुए। उत्तराखंड सरकार की ओर से आपदा में मारे गए लोगों का डीएनए डाटा बेस तैयार किया है। झज्जर सहित हरियाणा के अन्य जिलों के लोग भी देहरादून जाकर डीएनए से मिलान कर अपने परिजनों के अवशेष प्राप्त कर सकते हैं। इस संदर्भ में उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भी लिखा है।
- डा. चंद्रशेखर, उपायुक्त, झज्जर