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सोसायटी फ्लैट्स के ट्रांसफर पर रोक, ये है पीछे का सच

Wed, 16 Jul 2014 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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यूटी प्रशासन की ओर से कनवर्जन रेट तय करने में हो रही देरी के कारण पिछले छह महीनों से दक्षिणी सेक्टरों में बनी सोसाइटियों में फ्लैट्स का ट्रांसफर बंद है।
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हाईकोर्ट से फटकार पड़ने के बाद भी यूटी के कनवर्जन रेट तय नहीं किए हैं। इससे न तो लोग फ्लैट बेच पा रहे हैं और न ही कोई फ्लैट खरीद पा रहा है।

उपायुक्त मोहम्मद शाइन ने सात जनवरी को आदेश जारी कर सोसाइटियों के फ्लैट की ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। इस आदेश में स्पष्ट था कि यह फ्लैट्स लीज होल्ड से होल्ड होने के बाद ही ट्रांसफर किए जा सकेंगे। शहर में ऐसी सिर्फ 36 हाउसिंग सोसाइटियां ही हैं, जिन्हें जमीन फ्री होल्ड पर मिली है।

बाकी की 76 हाउसिंग सोसाइटियों को जमीन लीज होल्ड पर मिली है जो कि 99 साल के लिए है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड कराने के लिए प्रशासन ने कनवर्जन रेट तय करने हैं। अब जब तक रेट तय नहीं होंगे तब तक फ्लैटों का ट्रांसफर भी नहीं हो पाएगा।
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उपायुक्त ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि फ्लैट्स ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्री भी करवानी होगी और खरीदार को कलेक्टर रेट के अनुसार फीस देनी होगी।

इस आदेश के बावजूद जहां लोगों को फ्लैट बेचने के लिए पहले इसे लीज होल्ड से फ्री होल्ड करना होगा, वहीं इसके बाद रजिस्ट्री भी मौजूदा कलेक्टर रेट पर करानी होगी। इससे लोगों को फ्लैट ट्रांसफर कराने में मोटी रकम खर्च करनी होगी।

जनवरी से पहले तक संपदा विभाग सोसाइटियों के मकान मैनेजमेंट फीस लेकर ट्रांसफर कर देता था। इसमें ‘ए’ कैटेगरी के लिए 50, ‘बी’ के लिए 25 और ‘सी’ के लिए 15 हजार रुपये फीस ली जाती थी।

प्रशासन ने वर्ष 2009 में कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैटों को जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी (जीपीए) के जरिये ट्रांसफर करने की फीस को बेहद कम कर दिया था।

इससे प्रशासन को हर साल करोड़ों का नुकसान हुआ। जब प्रशासन को इसकी खबर लगी तो प्रशासन ने आदेश जारी किया कि फ्लैटों के ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्री भी करानी होगी।

हाउसिंग सोसाइटियों का मौजूदा कलेक्टर रेट 30,888 रुपये प्रति स्क्वॉयर फीट है। ऐसे में ए कैटेगरी का फ्लैट लेने के लिए लोगों को रजिस्ट्री कराने पर साढ़े पांच लाख तक खर्च करने होंगे।
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