माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने 10वीं की पढ़ाई यमुनानगर के स्वामी विवेकानंद स्कूल से की थी और कक्षा 12 गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-33 चंडीगढ़ से की। उसके बाद नीट में बाजी मारी और जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर दी।
तृतीय वर्ष में सिविल सेवा में जाने का ख्याल आया और पढ़ाई शुरू की तो रुचि जगती गई। कहती हैं कि कोरोना के कारण घर में रहना हुआ और पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल गया। युवा टाइम टेबल बनाकर नोट्स तैयार करें और नियमित अध्ययन करें। उनका भाई आईआईटी बांबे से पढ़ाई करके इंजीनियर बना है।
जो पद मिलेगा, स्वीकार करते हुए आईएएस की तैयारी करूंगी: अंकिता
चंडीगढ़ के सेक्टर सात निवासी अंकिता पंवार ने सेल्फ स्टडी करते हुए 321वीं रैंक पाई है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह मंजिल पाई है। उनके पिता भूप सिंह पंचकूला स्थित साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग हरियाणा में साइंटिफिक इंजीनियर हैं। उनकी माता कमलेश पंवार गृहिणी हैं। माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने नाम कर दिया।
अंकिता का कहना है कि उनका सपना आईएएस बनने का है। रैंक के मुताबिक जो भी पद मिलेगा, उस पर काम करते हुए आईएएस की तैयारी करेंगी। उन्होंने कक्षा 12 की पढ़ाई गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-19 चंडीगढ़ से की है। उसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया और वर्ष 2017 से 2019 तक बंगलूरू में इंजीनियर बनकर जॉब की।
उन्होंने वर्ष 2019 में भी सिविल सेवा की परीक्षा दी लेकिन सफल नहीं हो सकी। उसके बाद जॉब छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई और दूसरी बार में मंजिल पाई। कहती हैं कि कोरोना ने पढ़ाई प्रभावित नहीं की। उन्होंने युवाओं से कहा है कि कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है, बस अध्ययन लगातार होना चाहिए।
राजेश कुमार मोहन
जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस की पढ़ाई करके डॉक्टर बने राजेश कुमार मोहन का लक्ष्य आईपीएस बनने का है जो पूरा हुआ। उन्हें 102वीं रैंक मिली है। कहते हैं कि पांच साल से तैयारी कर रहे थे। पांचवी बार में सफलता मिली है। उनके पिता राज कंवर हरियाणा सचिवालय में काम करते हैं। पिता बेटे की सफलता से खुश हैं। डॉ. राजेश का कहना है कि वर्ष 2009 से 2014 तक एमबीबीएस की पढ़ाई की। उसके बाद ऑर्डिनेंस केबल फैक्ट्री चंडीगढ़ में मेडिकल ऑफिसर बने। वहां से नौकरी छोड़ने के बाद तिहाड़ जेल दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं।
दिल्ली में वह कोविड ड्यूटी पर हैं। उन्होंने कक्षा आठ से 12 तक की पढ़ाई मॉडल स्कूल चंडीगढ़ सेक्टर-16 से की है। डॉ. राजेश कहते हैं कि कोरोना हुआ और ठीक हुआ लेकिन तैयारी प्रभावित नहीं होने दी। कहते हैं कि साक्षात्कार का अभ्यास दर्पण के सामने खड़े होकर कई बार किया। गाइडेंस भी लिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि नियमित अध्ययन करें और अभ्यास करते रहें। उन्होंने बताया कि वह मूलत: हरियाणा के रोहतक जिले के गांव भराण के रहने वाले हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-39 में रहकर की पढ़ाई करते रहे। सिविल सर्विस की कोचिंग ऑनलाइन ली थी।