संसदीय कार्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने टीनू व्यवहार को अस्वीकार्य और निंदनीय बताते हुए स्पीकर से उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। टीनू अध्यक्ष को बैनर दिखाते हुए फ्लोर पार करके वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की बेंच के पास पहुंच गए। टीनू ने वित्त मंत्री को बैनर दिखाते हुए कथित तौर पर कुछ टिप्पणी की। इससे गुस्साए वित्त मंत्री अपनी सीट से उठ खड़े हुए।
इस बीच टीनू के व्यवहार को देखकर कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा और सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई कांग्रेसी विधायक सदन के बीचोबीच पहुंच गए। जीरा और पाहड़ा ने गुस्से में टीनू को धक्का दिया और उनसे बैनर छीनने की कोशिश की। इस दौरान कांग्रेस विधायकों और टीनू के बीच गर्मागर्म बहस भी हुई।
हालात को भांपते हुए अकाली विधायकों सुखविंदर कुमार, हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा, बलदेव सिंह खैरा और भाजपा के अरुण नारंग ने कांग्रेस विधायकों को शांत करने की कोशिश की। सत्ता पक्ष के विधायक परगट सिंह ने भी हस्तक्षेप किया और अपने साथी सदस्यों को शांत करने की कोशिश की। इसके बाद 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा और चरणजीत सिंह चन्नी ने टीनू के आचरण को शर्मनाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि टीनू ने मनप्रीत बादल के खिलाफ व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उनसे गाली-गलौज की है। ब्रह्म मोहिंदरा ने टीनू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाते हुए कहा,‘मैंने कभी वित्त मंत्री को इस तरह से उत्तेजित होते नहीं देखा।
आप अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि क्या कहा गया होगा, जिसने उन्हें अपनी सीट से खड़े होने और प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया।’ इस दौरान सदन में अकाली दल के सदस्य मौजूद नहीं थे। बाद में जब सदन में विभिन्न बिलों पर चर्चा हो रही थी, अकाली दल के सदस्य अपनी सीटों पर लौट आए।
अकाली दल के विधायक दल के नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों ने सदन में दावा किया कि टीनू के साथ बदसलूकी की गई है। ढिल्लों ने इस मुद्दे को हल करने के लिए स्पीकर से उनके कक्ष में बैठक बुलाने का आग्रह किया। ढिल्लों के इस आग्रह को स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। हालांकि उन्होंने भी अकाली दल के सदन में व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई।