चंडीगढ़ नगर निगम की 330वीं सदन की बैठक में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। वर्तमान मेयर अनूप गुप्ता के कार्यकाल की यह आखिरी बैठक है। आप के पार्षदों ने मेयर का जोरदार विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि मेयर ने अपने कार्यकाल में सभी महीनों की बैठक नहीं बुलाई।
बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर भी चर्चा होगी, जिसमें दो कम्युनिटी सेंटर का निर्माण, 345 ड्राइवरों के लिए नए टेंडर को अनुमति देने समेत अन्य हैं।
बैठक में तीन मुख्य एजेंडों के अलावा 10 सप्लीमेंट्री एजेंडों पर विस्तार से चर्चा होगी। तीन मुख्य एजेंडों में 52वें रोज फेस्टिवल के आयोजन के लिए अनुमानित राशि को मंजूरी देने, 345 ड्राइवर (एलएमवी), 14 सुपरवाइजर, 5 डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक अकाउंट क्लर्क मुहैया करने के लिए नए टेंडर को अनुमति देने, और पांच वाटर बूजर वॉटर टैंक खरीदने का एजेंडा है।
इसके अलावा 10 सप्लीमेंट्री एजेंडा में एमआरएफ केंद्रों में काम कर रहे 8 डाटा एंट्री ऑपरेटर की सेवाओं को विस्तार देने, सेक्टर-29 में पेवर ब्लॉक लगाने, सेक्टर-51 में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से कम्युनिटी सेंटर और सेक्टर-63 में करीब 11 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कम्युनिटी सेंटर का निर्माण, सेक्टर-28डी और ए में पाइप लाइन बिछाने का काम, सेक्टर-24डी में पुराने पब्लिक टॉयलेट ब्लॉक को दोबारा से बनाने, एमआरएफ केंद्रों पर कार्यरत 66 मल्टी टास्किंग वर्कर्स की सेवाओं को विस्तार और सभी सफाई कर्मचारियों को यूनिफॉर्म अलाउंस देने का एजेंडा शामिल है। नगर निगम के 112 भवनों पर करीब 17.15 करोड़ रुपये से सोलर पैनल भी लगाने की योजना है। सदन की बैठक में यह एजेंडा भी आएगा।
जुलाई में पार्षद जसविंदर कौर ने पूछे सवाल, अब तक नहीं दिया जवाब
वार्ड नंबर-1 की पार्षद जसविंदर कौर ने 24 जुलाई 2023 को नगर निगम के सचिव को तीन सवाल भेजे थे और सदन में उनके जवाब लाने का आग्रह किया था। अगस्त महीने में भी तीन सवाल पूछे लेकिन अब तक इनका जवाब नहीं दिया गया है। जसविंदर कौर ने कहा कि पार्षदों के सवालों का जवाब न देकर नगर निगम जनता की आवाज को कुचलने का काम कर रहा है। लोकतंत्र में सभी की जवाबदेही होती है, लेकिन नगर निगम पार्षदों द्वारा पूछे गए सवालों का जानबूझकर जवाब नहीं दिया जा रहा। जसविंदर कौर ने कैंबवाला के स्टेडियम की मरम्मत, बागवानी विभाग द्वारा लंबित कार्य, लाल डोरे से बाहर के ट्यूबवेल की जिम्मेदारी, वार्ड नंबर-1 में कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी, नगर निगम की तरफ से उनके वार्ड में आवंटित की गई दुकानों की संख्या और वसूलने वाले किराए की जानकारी और पार्षद ऑफिस के लिए एक साल पहले लिखे पत्र के बावजूद सामान न मिलने का कारण पूछा था।