अब हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों में शिशु की जांच कराने के लिए भागदौड़ नहीं करनी होगी। ऐसा संभव होगा रिमोट फीटल मॉनीटरिंग तकनीक से। इसके माध्यम से गर्भवती महिला खुद ही गर्भ में पल रहे शिशु की मॉनीटरिंग कर सकेगी और सारा डाटा डॉक्टर के पास एक मोबाइल एप से पहुंच जाएगा। इस तकनीक का इस्तेमाल फोर्टिस अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट गायनोकोलॉजिस्ट और आब्सेट्रिक्स डॉ. प्रीति जिंदल ने किया है।
चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. जिंदल ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल अब तक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों में किया गया है और एक महिला का प्रेग्नेंसी टाइम पूरा होने के बाद सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। इस तकनीक की मदद से फुल टर्म डिलीवरी संभव हो सकी है। इसमें शिशु का वजन 2.8 किलोग्राम निकला है।