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पंजाब: कोटकपूरा फायरिंग के मुख्य आरोपी परमराज उमरानंगल को आतंकियों से खतरा, सुरक्षा देने के निर्देश 

Wed, 15 Sep 2021 08:34 AM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में आतंकवाद के दौरान परमराज उमरानंगल के परिवार को सिख आतंकियों का सामना करना पड़ा था। उनके पिता को 1987 में भिंडरांवाला टाइगर फोर्स के आतंकियों ने मार डाला था। 1988 में गांव उमरानंगल में उनके परिवार पर भी आतंकियों ने कई बार हमले किए।
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परमराज सिंह उमरानंगल। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कहा है कि वह कोटकपूरा-बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले के मुख्य आरोपी पुलिस अधिकारी परमराज उमरानंगल और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करे। मंत्रालय ने उमरानंगल और उनके परिवार को सिख कट्टरपंथियों और आतंकियों से गंभीर खतरे की आशंका जताई है।  

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परमराज उमरानंगल ने मंत्रालय से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए आग्रह किया था। इस पर मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से राय मांगी थी। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जो रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी है, उसके अनुसार, पंजाब में आतंकवाद के दौरान उमरानंगल के परिवार को सिख आतंकियों का सामना करना पड़ा था। उनके पिता को 1987 में भिंडरांवाला टाइगर फोर्स के आतंकियों ने मार डाला था। 1988 में गांव उमरानंगल में उनके परिवार पर भी आतंकियों ने कई बार हमले किए।


पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि कोटकपूरा-बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले में मुख्य आरोपी होने के कारण, उमरानंगल को भारत और विदेश में छिपे सिख कट्टरपंथियों की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में, प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन पर और पंजाब के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर सिखों पर कथित अत्याचार का आरोप लगाया था और विदेशों में रहने वाले उनके परिजनों और रिश्तेदारों की पहचान जानने की कोशिश की थी। 
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निहत्थे सिखों पर फायरिंग के आरोपी हैं उमरानंगल
फरीदकोट में अक्तूबर, 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटना सामने आने के बाद कोटकपूरा में सिखों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। इस दौरान 14 अक्तूबर, 2015 को पुलिस ने धरना दे रहे सिखों को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की, जिसमें दो प्रदर्शनकारी सिखों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे। इस मामले में तीन बड़े पुलिस अधिकारियों तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी, आईजी परमराज उमरानंगल और चरणजीत शर्मा को पंजाब का सिख समुदाय मुख्य दोषी मानता है और लगातार इनकी गिरफ्तारी की मांग करता रहा है। 

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