साहिल के मुताबिक जब वह जेल में वापस जाने लगे तो उसे और उसके साथियों को रोक कर जेल प्रशासन ने शराब का टेस्ट करवाने के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया। साहिल ने कहा कि अक्सर वह जब भी पेशी पर जाते हैं तो पुलिस कर्मचारियों को पैसे देकर शराब पीते हैं। साहिल ने एक डिप्टी सुपरिंटेंडेट पर मोबाइल खरीद-फरोख्त के बड़े आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद कहीं न कहीं जेल प्रशासन के अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
साहिल ने आरोप लगाया कि पेशी पर जाते समय उनके पास कोई पैसे नहीं होते। जब पुलिस कर्मचारी पैसे लेने के लिए राजी हो जाता है तो उसे किसी तरह से पैसे पहुंचा दिए जाते हैं। उसके साथ मुलाजिमों ने जतिन मोंगा, दीपू कुमार, विशाल गिल और मनप्रीत पाल का भी मेडिकल करवाया है।
जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई: एडीसीपी
एडीसीपी (मुख्यालय) रूपिंदर कौर भट्टी ने बताया कि उनके ध्यान में सारा मामला आ गया है। इसके बाद सीनियर अधिकारियों को भी जानकारी दे दी है। जो आरोप हवालातियों ने साथ गए पुलिस मुलाजिमों पर लगाए हैं, इसकी जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट गुरुवार तक आएगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी।