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महादान: 110 साल के उजागर राम चैंबर की आंखें की गईं दान... इस उम्र में भी सुई में धागा पिरो लेते थे

Tue, 26 Dec 2023 12:01 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

उजागर राम चैंबर का जन्म 03 जनवरी, 1914 को ग्राम उड़ापड़ जिला नवांशहर में हुआ था। उनका विवाह 1937 में करतारी देवी से हुआ था। वह प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर टहलने निकल जाते थे। 
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110 साल के उजागर चैंबर की आंखें दान की गई। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आज के समय में जहां बच्चों व नौजवानों की आंखों की रोशनी कम होती जा रही है, वहीं एक ऐसे बुजुर्ग थे जो 107 साल की उम्र में भी बिना चश्मे के सुई में धागा पिरो लेते थे। बुजुर्ग उजागर राम चैंबर के देखने, सुनने व समझने की शक्ति युवाओं से भी अधिक थी। सोमवार सुबह चार बजे घर में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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ऐसा निरोग जीवन जीने वाले बाबा बोहड़ उजागर राम चैंबर की आंखें दान कर दी गई हैं। उनका कहना था कि उन्होंने काफी समय इन आंखों से दुनिया देखी है। वह चाहते थे कि उनकी आंखों से वह शख्स दुनिया देखे, जिसकी जिंदगी में अंधेरा है। उन्होंने एसपी सिंह, करम चंद सेंखो के नेतृत्व में अपनी आंखें दान कीं। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे गुरचरण चैंबर, नीलम, डॉ. राजीव चैंबर व डॉ. गुलताज ने आंखें दान करवाने की रस्म निभाई। एसपी सिंह ने कहा कि उजागर राम चैंबर का आंखें दान करना बाकियों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत है।
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1914 में जन्मे चैंबर कभी अस्पताल नहीं गए
उजागर राम चैंबर का जन्म 03 जनवरी, 1914 को ग्राम उड़ापड़ जिला नवांशहर में हुआ था। उनका विवाह 1937 में करतारी देवी से हुआ था। वह प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर टहलने निकल जाते थे। जीवन में कभी कोई गोली या कैप्सूल न लेने वाले उजागर राम चैंबर कभी अस्पताल तक नहीं गए थे। वह अपने छोटे बेटे गुरचरण दास के साथ रह रहे थे, जो डिप्टी एक्साइज टैक्सेशन कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 
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उनका छोटा बेटा इस समय 75 साल का है व बड़ा बेटा 86 साल का है। उनके बेटों का कहना है कि इस उम्र में उनके पिता जी का अपनी आंखें दान करना लोगों का मार्गदर्शन करने का काम है। वह चाहे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वह अब भी किसी को दान की अपनी आंखों से दुनिया में जिंदा रहेंगे।

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