राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत शहर में लाभार्थियों को राशन नहीं दिया जाता, बल्कि पीले कार्डधारक परिवार के लिए 125.46 रुपये प्रति सदस्य (हर माह) व अंत्योदय अन्न योजना के तहत 878.22 रुपये प्रति परिवार (हर माह) जारी किए जाते हैं। विभाग को संदेह है कि शहर में अब भी कई ऐसे परिवार हैं, जो सक्षम हैं लेकिन योजना के तहत राशन ले रहे हैं, इसलिए एक हफ्ते बाद पीएमजीकेवाई के चौथे चरण के राशन वितरण के साथ विभाग ई-केवाईसी शुरू करेगा। इसके तहत जो भी व्यक्ति राशन लेने आएगा, उससे कुछ जानकारियां मांगी जाएंगी। इनकी मदद से खाद्य विभाग अपने डाटा को अपडेट करेगा और अगर कोई ऐसा मिलता है, जिसकी आय एनएफएसए-2013 के मानदंडों से ज्यादा है तो उसे लाभार्थियों की सूची से बाहर किया जाएगा। पीएमजीकेवाई के तहत तीन बार राशन बांटा जा चुका है, लेकिन हर बार तीन से चार हजार परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने एक बार भी राशन नहीं उठाया है। विभाग के अनुसार ऐसे परिवारों की सब्सिडी काटी जाएगी।
भौतिक सत्यापन में सामने आई यह सच्चाई
- राशन कार्ड बनवाया और चंडीगढ़ छोड़कर गांव में जा बसे
- विभाग को दिए पते पर रहते ही नहीं
- खाद्य विभाग के अधिकारी घर गए तो लाभार्थी उन्हें हर तरह से सक्षम लगे। उदाहरण के तौर पर बड़ा घर और एसी भी लगा हुआ पाया गया। घर में गाड़ी भी खड़ी मिली।
- आरएलए के डाटा के अनुसार, कार्ड धारक के नाम गाड़ी पंजीकृत
- बिजली की खपत 300 यूनिट से कई गुना ज्यादा
- घर जाने पर कुछ लोगों ने खुद ही सब्सिडी खत्म करने का किया आग्रह
खाद्य विभाग ने आरएलए व बिजली विभाग का डाटा और फिर भौतिक सत्यापन कर ऐसे लोगों की पहचान की, जो सक्षम थे लेकिन डीबीटी लाभार्थी की सूची में थे। इन्हें अब सूची से बाहर कर दिया गया है। अब राशन बांटने के साथ ई-केवाईसी भी की जाएगी। - नितिका पवार, निदेशक, खाद्य विभाग