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व्हाट्सएप ने मां-बाप से मिलाई लापता दो सगी बहनें, खेलते-खेलते ट्रेन में बैठ गई थीं, जानिए मामला

Tue, 07 May 2019 10:51 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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फाइल फोटो
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चार दिन से लापता दो सगी बहनों को मां-बाप से मिलाने में सोशल मीडिया साइट व्हाट्सएप ने अहम भूमिका निभाई, क्योंकि फोटो वायरल हो गई थी। मामला हरियाणा के पानीपत का है। रेलवे स्टेशन पर गत दो मई को एक ट्रेन के टीटी को दो बच्चियां लावारिस हालत में मिलीं। पूछताछ में पता चला कि वे अपने माता-पिता से बिछड़ गईं हैं। टीटी ने दोनों बच्चियों को आरपीएफ पानीपत के सुपुर्द कर दिया।
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आरपीएफ ने दोनों बच्चियों को उसी रात पानीपत सीडब्ल्यूसी के माध्यम से शेलटर होम में भिजवा दिया। इसके बाद सीडब्ल्यूसी टीम के सदस्य बच्चियों के परिजनों तक पहुंचने के प्रयासों में जुट गए। इस बीच चंडीगढ़-हरियाणा के लोगों के साझा व्हाट्सएप ग्रुप में दोनों में से एक बच्ची के स्कूल का पहचान-पत्र वायरल हुआ। इस ग्रुप में पानीपत सीडब्ल्यूसी के एक सदस्य भी जुड़े हुए थे।

उन्होंने पहचान-पत्र वाली बच्ची के फोटो को मिलाया और स्कूल से संपर्क किया। स्कूल के प्रिंसिपल से बातचीत करके बच्चियों के चंडीगढ़ से ही होने की पुष्टि हुई। इसके बाद वहां की सीडब्ल्यूसी टीम से संपर्क साधा गया। मंगलवार को सभी कागजी कार्रवाई पूरी होने पर बुधवार को लीगल सेल व पुलिस के माध्यम से बच्चियों को चंडीगढ़ सीडब्ल्यूसी टीम को सौंपा जाएगा।
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पिता लगाते हैं गोल-गप्पे की रेहड़ी, इंटरनेट के माध्यम से ढूंढ निकाला

सीडब्ल्यूसी सदस्य डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि गत दो मई की रात दो बजे पानीपत आरपीएफ ने उनसे संपर्क किया। 10 साल व 7 साल की दो सगी बहनों को रेलवे स्टेशन पर टीटी ने आरपीएफ को सौंपा था। टीटी ने आरपीएफ को बताया था कि दोनों बच्चियां चंडीगढ़ से ट्रेन में बैठी थीं और उनसे टिकट के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया था कि वे खेलती-खेलती ट्रेन में बैठ गईं थीं।

बच्चियों को उक्त रात को ही शेलटर होम भिजवाया गया। बातचीत में पता लगा कि दोनों चंडीगढ़ से ही हैं। सोमवार को पंचकूला के पूर्व विधायक की पत्नी अंजलि डीके बंसल नामक व्हाट्सएप ग्रुप में बच्ची का स्कूल सर्टिफिकेट जारी हुआ। इसमें बच्ची की गुमशुदगी के बारे में मैसेज था। इस ग्रुप में पानीपत सीडब्ल्यूसी टीम के सदस्य मुकेश आर्य भी जुड़े हुए थे। सर्टिफिकेट में लगी फोटो के आधार पर डिटेल मैच की, तो पाया कि ये ही बच्ची है।

सर्टिफिकेट को बच्ची ने भी पहचान लिया। ग्रुप में जिसने ये फोटो डाली, उससे संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद इंटरनेट से स्कूल का नंबर निकाला। जिसके बाद प्राचार्य से बातचीत की गई और उन्होंने बच्चियों को भी पहचान लिया। इसके बाद प्राचार्य की बच्ची से बात करवाई गई। प्राचार्य से स्कूल रिकॉर्ड में बच्ची के परिजनों का मोबाइल फोन नंबर को सर्च कर उनसे संपर्क साधने को कहा गया है।

वहीं बच्चियों ने बताया कि उनके पिता सुखना लेक के आस-पास गोल-गप्पे की रेहड़ी लगाते हैं।
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