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Punjab News: राज्यपाल ने CM मान को लिखा जवाबी पत्र- कहा- गैरकानूनी था पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय सत्र

Mon, 17 Jul 2023 07:26 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राज्यपाल पुरोहित ने सोमवार को मुख्यमंत्री मान को भेजे पत्र में साफ कर दिया है कि वह चार विधेयकों पर फैसला लेने से पहले दो दिवसीय विधानसभा सत्र की वैधता के बारे में विश्वस्त होंगे और विधि सम्मत कार्रवाई करेंगे।
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Punjab News: - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी फिर बढ़ती दिख रही है। पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को जोर का झटका दिया है। उन्होंने 19-20 जून को बुलाया गया पंजाब विधानसभा के सत्र को गैरकानूनी ठहरा दिया है। अब सत्र के दौरान विधानसभा में पारित चार बहुचर्चित विधेयकों की वैधता पर भी सवाल उठ गए हैं।

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राज्यपाल पुरोहित ने सोमवार को मुख्यमंत्री मान को भेजे पत्र में साफ कर दिया है कि वह चार विधेयकों पर फैसला लेने से पहले दो दिवसीय विधानसभा सत्र की वैधता के बारे में विश्वस्त होंगे और विधि सम्मत कार्रवाई करेंगे।

गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने 15 जुलाई को राज्यपाल को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने सिख गुरुद्वारा संशोधन एक्ट 2023 को मंजूरी देने में हो रही देरी पर सवाल उठाया था। सोमवार को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के इसी पत्र का हवाला दिया और जवाब लिखा कि आपके दावे से ऐसा प्रतीत होता है कि आप ‘एक विशेष राजनीतिक परिवार’ के कुछ कार्यों से चिंतित हैं, जिसने आपको संदर्भित (गुरुद्वारा एक्ट) विधेयक पारित करने के लिए प्रेरित किया है। 

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आपने यह भी बताया है कि विधेयक पर तुरंत हस्ताक्षर करने में मेरी ओर से किसी भी देरी के संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं। आपने मेरे द्वारा लिए गए समय को पंजाब के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का गला घोंटने के समान बताया है, जो आपकी निजी धारणा प्रतीत होती है। उस पर मैं आपसे कुछ भी कहना नहीं चाहता लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि राज्यपाल के रूप में मुझे भारत के संविधान द्वारा यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि विधेयकों को कानून के अनुसार पारित किया जाए।

राज्यपाल ने आगे लिखा कि अपने कर्तव्यों का कर्तव्यनिष्ठा से निर्वहन करने के लिए, मैंने कानूनी सलाह प्राप्त की है। इससे मुझे विश्वास हो गया है कि आपके द्वारा 19 और 20 जून को विधानसभा सत्र बुलाना, जिसमें ये चार विधेयक पारित किए गए थे, कानून और प्रक्रिया का उल्लंघन था। इससे उन विधेयकों की वैधता और वैधानिकता पर संदेह पैदा हो गया है।

राज्यपाल ने पत्र में स्पष्ट किया कि प्राप्त कानूनी सलाह की पृष्ठभूमि में, मैं सक्रिय रूप से इस बात पर विचार कर रहा हूं कि क्या भारत के अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय प्राप्त की जाए, या संविधान के अनुसार इन विधेयकों को भारत के राष्ट्रपति के विचार और सहमति के लिए आरक्षित कर दिया जाए।

राज्यपाल ने मान से कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आप इस बात की सराहना करेंगे कि पंजाब के लोग यह सुनिश्चित करने के लिए समान रूप से चिंतित हैं कि जो कानून अंततः उन्हें प्रभावित करते हैं, उन्हें उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद पारित किया जाए। इसलिए आप निश्चिंत रहें कि 19 और 20 जून को आयोजित विधानसभा सत्र की वैधानिकता का प्रथम परीक्षण कराकर मैं विधि सम्मत कार्रवाई करूंगा।

सरकार-राजभवन में लंबे समय से टकराव

पंजाब में आप सरकार व राजभवन के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। कई मुद्दों पर सीएम और राज्यपाल आमने-सामने हो चुके हैं।

 
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पहले भी इन मुद्दों पर हो चुका विवाद

  • राज्यपाल ने पीटीयू के वीसी की नियुक्ति के मामले में सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालयों में वीसी की नियुक्ति में सरकार ने यूजीसी के नियम नहीं माने। अगली बार अगर नियमों का पालन नहीं किया तो मंजूरी नहीं दी जाएगी।
  • पुरोहित ने कहा था कि सीएम मान कहते हैं कि पंजाब सरकार के हेलिकॉप्टर से मैं इधर-उधर घूम रहा हूं। मैं एलान करता हूं कि जब तक पंजाब में हूं, सरकार के हेलिकॉप्टर का कभी इस्तेमाल नहीं करूंगा।
  • शिक्षकों को विदेश भेजकर ट्रेनिंग दिलाने के मामले में उन्होंने सरकार से 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा था। मान ने कहा था कि वह 3 करोड़ पंजाबियों के प्रति जवाबदेह हैं न कि किसी सलेक्टेड व्यक्ति के प्रति।
  • तीन मार्च को विधानसभा के बजट सत्र की मंजूरी देने से राज्यपाल ने इन्कार कर दिया था। उन्होंने सरकार को पहले एजेंडा भेजने की बात कही थी। सरकार इस मामले में अदालत तक गई। इसके बाद राज्यपाल ने सत्र को मंजूरी दी।
  • विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने जैसे ही अपना अभिभाषण शुरू किया, उस दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने अभिभाषण में राज्यपाल की ओर से 'माई गवर्नमेंट' (मेरी सरकार) कहे जाने पर सवाल उठाया था।
 

एसएसपी विवाद

राज्यपाल के आदेश पर चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप चहल को कार्यकाल खत्म होने से 10 महीने पहले ही पंजाब के मूल कैडर में वापस भेजने के फैसले पर मान सरकार ने आपत्ति जताई थी। मुख्यमंत्री मान ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा था कि उनसे इस मुद्दे पर चर्चा क्यों नहीं की गई। मान का कहना था कि एसएसपी का कार्यकाल तीन साल का होता है, जो पूरा नहीं हुआ। 

धामी ने राज्यपाल के जवाब पर जताई संतुष्टि

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित द्वारा राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में पंजाब सरकार को भेजे गए जवाब पर संतोष व्यक्त किया है। धामी ने उम्मीद जताई है कि वह इसके अनुरूप निर्णय लेंगे। भविष्य में भी कानून के अनुसार ही राज्यपाल फैसला लेंगे और लोगों की भावनाओं का भी ध्यान रखेंगे। धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्यपाल द्वारा भेजे गए जवाब से सबक लेना चाहिए और भविष्य में असंवैधानिक और मनमाने फैसलों से बचना चाहिए।
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