चंडीगढ़। साइकिल में रिफ्लेक्टर आईएसओ मानकों के अनुरूप न लगाना डेकाथलॉन को महंगा पड़ गया। साइकिल में रिफ्लेक्टर सही से काम न करने से सेक्टर-27 का व्यक्ति दो बार दुर्घटना का शिकार हो गया। इस पर उसने अवैध व्यापार प्रथा और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज किया। आयोग ने कंपनी को साइकिल की राशि 13 हजार रुपए 9 प्रतिशत ब्याज और 10 हजार रुपये का मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च का मुआवजा देने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता रवि इंदर सिंह ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि उसने 22 अगस्त 2019 को डेकाथलॉन से 13 हजार रुपए की एक साइकिल खरीदी थी। कुछ हफ्तों में ही साइकिल चलाते हुए उसको दो बार मोटर चालकों ने टक्कर मार दी। दोनों मोटर चालकों का कहना था कि शिकायतकर्ता और उनकी साइकिल अंधेरे में उन्हें दिखी नहीं जबकि उनके वाहन की लाइट भी जल रही थी। साइकिल पर दस रिफ्लेक्टर लगे होने के बावजूद दूसरे वाहनों को साइकिल का न दिखाई देने की बात सुनकर जब शिकायतकर्ता ने रिफ्लेक्टर की जांच के लिए ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी’ (आईसीऐटी) को भेजा।
जांच में आया कि रिफ्लेक्टर आईएसओ मानकों के अनुरूप नहीं थे। इस पर शिकायतकर्ता ने डेकाथलॉन पर अवैध व्यापार प्रथा और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए साइकिल की पूरी राशि वापस मांगी। परंतु कंपनी ने उस पर कोई जवाब नहीं दिया तो उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने पाया कि डेकाथलॉन द्वारा सेवा में कमी के चलते शिकायतकर्ता का दो बार दुर्घटना का सामना करना पड़ा जो बिलकुल उचित नहीं है। इस पर आयोग ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए साइकिल की पूरी राशि 9 प्रतिशत ब्याज और शिकायतकर्ता को 10 हज़ार रुपए मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के किया मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।