पिछले साल नगर निगम को फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के लिए 2 करोड़ का बजट मिला था। इसमें से सिर्फ 33 हजार रुपये खर्च किए गए और बाकी का बजट लैप्स हो गया।
नगर निगम के अधिकारी फायर सेफ्टी के प्रति कितने गंभीर हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। अब इस साल फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के लिए 12 करोड़ का बजट मिला है।
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अग्नि सुरक्षा तंत्र का हाल
- फायर विभाग की 27 गाड़ियों में से 22 वर्किंग कंडीशन में हैं, जिनमें से अधिकतर में फर्स्ट एड किट तक नहीं है।
- 362 पोस्टें लंबे समय से खाली पड़ी हैं
- हर स्टेशन पर केवल 2 ही फायर सूट हैं जबकि हर फायरमैन को फायर सूट मिलने चाहिए
- न ही पर्याप्त हेलमेट हैं और न ही मास्क
- नए फायर टेंडर के लिए इंजन मंगवाए, लेकिन उनमें चेसिस फिट नहीं की। काफी समय से खड़ी हैं ये गाड़ियां
- कई गाड़ियों के टायर लंबे समय से नहीं बदले
(फायर कमेटी की रिपोर्ट में ये बताई गई थीं कमियां)
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10 महीनों से नहीं हुई फायर कमेटी की बैठक
निगम की फायर एंड इमरजेंसी कमेटी की पिछले 10 महीनों से कोई बैठक नहीं हुई। आखिरी बैठक अगस्त, 2013 में हुई थी। उस दौरान कमेटी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए थे। कमेटी की रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ऐसा नहीं हैं। हमारे पास सभी उपकरण मौजूद हैं। रही बात मास्क की तो यह तभी पहना जाता है जब आग बुझाने के लिए बिल्डिंग के अंदर जाते हैं। बाहर से कार्रवाई के दौरान मास्क लगाने की जरूरत नहीं होती।
- वीपी सिंह, कमिश्नर, नगर निगम
फायर एंड इमरजेंसी की पिछले साल की कमेटी में मैं भी मेंबर था। पिछले साल अगस्त में हमने नगर निगम को रिपोर्ट दी थी जिसमें फायर डिपार्टमेंट की कई खामियां सामने आई थीं।
- सुरिंदर बाहगा, मनोनीत पार्षद