आजादी से पहले भारत के जो हालात थे, आजादी के 69 वर्ष बाद भी वैसे ही हैं। तब देश अंग्रेजों की यातनाएं सह रहा था और अब देश के भीतरी हालात उसे दीमक की तरह खा रहे हैं। कुछ ऐसा ही संदेश सेक्टर 42 की मिनी लेक पर हुए नुक्कड़ नाटक आजाद ने दिया। इसका मंचन थिएटर फॉर थिएटर ग्रुप के 10 कलाकारों ने किया।
नाटक की शुरुआत शहीद-ए-आजम सरदार ऊधम सिंह के बुत से होती है। जिसे देखकर लोग उनके हिंदू, सिख, मुस्लिम और ईसाई होने को लेकर आपस में लड़ने लग जाते हैं। ऊधम सिंह का बुत यह हालात देख काफी परेशान होता है और एक दिन उसमें आत्मा आ जाती। वह इंसानों की दुनिया में रहने लगता है।
वह उनसे पूछता है कि क्या भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने इसी दिन केलिए कुर्बानी दी थी कि तुम लोग धर्म और जाति के नाम पर आपस में झगड़ो। नाटक के अंत में सरदार ऊधम सिंह का बुत सभी लोगों को आपस में मिलजुल कर रहने को कहता है, और देश में शांति और सद्भावना का माहौल पैदा करने का आदेश देता है। 45 मिनट के इस नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा ने किया था।