कुलपति ने बताया कि फरवरी के बाद वैक्सीन बाजार में आ सकती है। फिलहाल भारत बॉयोटैक कंपनी इस वैक्सीन पर शोध करवा रही है। शोध में सफल होने पर आईसीएमआर की ओर से वैक्सीन निर्माण का काम संबंधित कंपनी को दिया जाएगा। उसके बाद बाजार में वैक्सीन उपलब्ध होगी।
वैक्सीन से अधिक उम्मीद
एक्सपर्ट मानते हैं कि विदेश में चल रही रिसर्च की तुलना में भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन अधिक कामयाब होगी, क्योंकि इसे देश में पाए जाने वाले वायरस के स्टेन के आधार पर तैयार किया गया है। हम इसे प्रयोग करेंगे तो अधिक प्रभावशाली रहेगा।
ऐसे समझे वैक्सीन का विज्ञान
वैक्सीन की रिसर्च के को-इन्वेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि कोवैक्सीन किल्ड वैक्सीन है। इसलिए इसके नुकसानदायक होने की आशंका नहीं रहती। रोहतक पीजीआईएमएस के पास तीसरे फेज के परीक्षण के लिए 200 वैक्सीन आ गई हैं। इसमें पहली डोज स्वास्थ्य मंत्री को दी गई। एक्सपर्ट ने बताया कि वैक्सीन दो प्रकार की होती है। एक लाइव व दूसरी किल्ड।
किल्ड वैक्सीन में जो मैटेरियल इंजेक्शन से शरीर में भेजा जाता है, उसके वॉल को केमिकल से किल कर दिया जाता है। वह शरीर के अंदर जाकर धीरे-धीरे एंटी बॉडी प्रोड्यूस करता है और शरीर को लड़ने लायक बनाता है। लाइव वैक्सीन में वॉल को केमिकल से हटा दिया जाता है और यह खतरा पैदा नहीं कर सकता, क्योंकि वॉल का आउटर एरिया ही परेशान करता है। वैक्सीन इसलिए सुरक्षित है, यह शरीर में जा कर धीरे-धीरे अपना प्रोडक्शन करती है।