चंडीगढ़। कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। चंडीगढ़ को-ऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों ने शनिवार को मेयर सरबजीत कौर और डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता के साथ बैठक कर आपत्ति जताई। कहा कि प्रशासन के प्रस्ताव में भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाना गलत है। इसे वापस लिया जाए। कमेटी ने आगामी दिनों में कार रैली निकालकर विरोध का एलान किया। वहीं उद्योग व्यापार मंडल (यूवीएम) ने यूटी प्रशासन की ओर से आदेश वापस न लेने पर सभी मार्केटों में विरोध का एलान कर दिया है।
एक्ट में संशोधन के लिए यूटी के सार्वजनिक नोटिस के विरोध के लिए व्यापारियों, उद्योगपतियों और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों ने मिलकर चंडीगढ़ को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया है। इसमें 15 से अधिक संघ शामिल हैं। इस प्रस्ताव के विरोध में चंडीगढ़ को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने सेक्टर-43 में एक बैठक की। बैठक में शामिल मेयर व सीनियर डिप्टी मेयर ने आश्वासन दिया कि वह कमेटी के समर्थन में हैं। जल्द ही इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों से मुलाकात कर व्यापारियों के साथ बैठक का प्रस्ताव रखेंगे ताकि इसके समाधान पर विचार हो सके। को-ऑर्डिनेशन कमेटी की ओर से जल्द शहर में एक कैंडल मार्च और कार रैली निकालने की घोषणा की गई। इस दौरान कारों पर और दुकानों व कारखानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर भी लगाए जाएंगे।
दूसरी ओर यूवीएम के अध्यक्ष कैलाश जैन का कहना है कि इस संबंध में यूटी प्रशासन लोगों से सुझाव व आपत्ति लेने के बाद प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजता। वहां से प्रस्ताव लोकसभा में आता फिर जो निर्णय होता वह चंडीगढ़ में लागू होता। इस आदेश से तो लगता है चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र और लोकसभा दोनों से ऊपर हो गया है।
लोकसभा के बिना कोई कानून में संशोधन नहीं कर सकता
सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में यूवीएम ने प्रशासन के आदेश के विरोध में प्रेसवार्ता कर कहा कि किसी भी कानून में संशोधन का अधिकार लोकसभा और राज्यसभा के पास है लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन उनसे ऊपर हो गया है और कानून में संशोधन का आदेश जारी कर रहा है। यूवीएम के अध्यक्ष कैलाश जैन ने कहा कि 10 दिन का समय तय कर लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगा गया है। इसमें पांच दिन छुट्टियों में निकल गए। प्रशासन ने योजना बनाकर इस आदेश को जारी किया है ताकि इसका विरोध न हो सके। प्रशासन पहले भवन निर्माण में उल्लंघन और दुरुपयोग की परिभाषा स्पष्ट करे। जल्द आदेश को निरस्त नहीं किया गया तो सभी मार्केटों में विरोध प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
जिस कानून का दिया हवाला, उसमें जगह के दुरुपयोग का जिक्र ही नहीं
कैलाश जैन ने कहा कि जिस कानून के तहत यह आदेश जारी हुआ है उसमें कहीं भी भवन निर्माण में उल्लंघन और दुरुपयोग का जिक्र ही नहीं है। कैपिटल ऑफ पंजाब डेवलपमेंट और रेगुलेशन एक्ट 1952 को वर्ष 1966 में पंजाब विधानमंडल ने पास किया था। उसी आधार पर चंडीगढ़ में भी इसे लागू किया गया। प्रशासन की ओर से जारी आदेश में इस कानून की धारा 13, 14 और 15 का जिक्र है। धारा 13 के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति कानून को न माने तो उस पर 500 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। इसके बाद भी भी वह व्यक्ति न माने तो 20 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी तरह धारा 14 में पेड़ों पर विज्ञापन न लगाने और धारा 15 में नियमों की अवहेलना कर मलबा इत्यादि को मौके पर छोड़ने पर भी यही जुर्माना लागू होता है। इन तीनों धाराओं में कहीं भी भवन निर्माण व उसके दुरुपयोग का जिक्र नहीं है।
एस्टेट ऑफिस के इस प्रस्ताव का हो रहा है विरोध
कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन करके प्रशासन ने भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। नए प्रस्ताव में सभी तरह के उल्लंघन के लिए अब फिक्स 2 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। अगर उल्लंघन को हटाया नहीं जाता है, तो 8 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चार्जेज तय किए गए हैं। वर्ष 2007 में प्रशासन ने भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 10 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति स्क्वॉयर फुट प्रति महीने कर दी थी। जिसके बाद ही शहर के अधिकतर व्यापारियों और उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये के नोटिस भेजे गए। अभी तक उनमें से कई मामलों में सुनवाई चल रही है।