कोरोना के बढ़ते केसों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तमाम सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) को सैंपलों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं लेकिन लोगों की लापरवाही यहां पर भी आड़े आ रही है। लोग सैंपल देने से भी कतरा रहे हैं। दूसरा, राज्य में धड़ल्ले से धार्मिक और राजनीतिक आयोजन किए जा रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर चल रहीं महापंचायतें भी कोरोना संक्रमण के लिए नई चेन साबित हो सकती हैं।
बीपी, शुगर, किडनी के मरीजों के लिए खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि वैसे तो कोरोना को हल्के में लेना स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी खतरनाक हो सकता है। लेकिन यह उनके लिए ज्यादा खतरनाक है, जो पहले से बीमार हैं। खासकर बीपी, शुगर, टीबी और किडनी समेत गंभीर बीमारियों के पीड़ितों की परेशानी कोरोना के चपेट में आने से बढ़ सकती है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि बीमार बुजुर्गों और बच्चों को हर हाल में कोरोना से बचा कर रखें। विशेषज्ञ डॉ. अभिनव डागर का कहना है कि कोरोना महामारी की लहर चल रही है, कभी यह कम हो जाता है तो कभी तेज। विदेश और अन्य राज्यों को देखते हुए यहां भी दोबारा से कोरोना के केस बढ़ सकते हैं।
भारी पड़ सकती है लापरवाही : डॉ. कांबोज
स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. सूरजभान कांबोज का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि पहले के मुकाबले सख्ती कम होने के कारण लोग लापरवाह हुए हैं लेकिन ये लापरवाही भारी पड़ सकती है। मास्क लगाकर व्यक्ति 99 प्रतिशत तक कोरोना संक्रमण से बच सकता है। कोरोना से लड़ने के लिए आम जनता को साथ आना होगा और सभी नियमों का पालन करना होगा।