टैगोर थिएटर में अदब फाउंडेशन और दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल की ओर से तीन दिवसीय चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया गया।
फेस्टिवल में देशभर से कई लेखक हिस्सा लेंगे। पहले दिन बच्चों को चित्रों के साथ कहानी, कलात्मक लेखन, अपने लिए किताबों का चयन करने विषयों के बारे में बारीकियां समझाई गईं। इसी दौरान प्रेस वार्ता में लेखकों ने साहित्य और लेखन से जुड़े अनुभव साझा किए।
बच्चों के लिए लिखना है ज्यादा मुश्किल : प्रिया
प्रिया कुरियन ने बताया कि उन्होंने कभी लिखने के बारे में नहीं सोचा था। अहमदाबाद के नेशनल स्कूल ऑफ डिजाइन से पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई कि एक विज्ञापन कंपनी को ज्वाइन कर लिया, जहां वह बच्चों के लिए एनीमेटिड एड बनाती थीं।
एक दिन दिल्ली के असामी स्ट्रीट फेस्टिवल में हिस्सा लेने का मौका मिला तो वहां उन्हें ख्याल आया कि बच्चों के लिए कुछ ऐसी चीज बनाई जाए, जिसमें उन्हें मनोरंजन के साथ जानकारी भी मिले। इसी दौरान उन्होंने अपनी पहली किताब लिखी, जिसका नाम आई एम सो स्लीपी रखा। प्रिया ने बताया कि इलस्ट्रेशन के साथ कहानी को आगे बढ़ाना बहुत मजेदार होता है। पुराने समय में भी कॉमिक इसीलिए बहुत पसंद की जाती थीं। उन्होंने कहा बच्चों के लिए लिखना मुश्किल तो होता है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले बच्चों के मन को समझना पड़ता है।