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बुड़ैल जेल में बंद गैंगस्टर से तीसरी बार मिला मोबाइल

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व डीएसपी जगबीर सिंह पर गोली चलाने के मामले में बुड़ैल जेल में बंद गैंगस्टर राजन भट्टी के पास से तीसरी बार मोबाइल मिला है। हैरत की बात यह है कि पिछले एक साल से बाहरी लोगों को कैदियों से मिलने की अनुमति तक नहीं है तो फिर राजन तक मोबाइल कैसे पहुंचा। दूसरी ओर, जेल अधिकारी स्टाफ की भूमिका जांचने में जुट गए हैं। सेक्टर-49 थाना पुलिस ने राजन भट्टी के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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वीरवार सुबह कार्यकारी जेल सुपरिंटेंडेंट दीप कुमार को सूचना मिली कि बैरक नंबर 15 में राजन भट्टी के पास से कुछ संदिग्ध सामान है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने बैरक में सर्च किया तो राजन भट्टी के पास से एक मोबाइल, सिम और ईयरफोन बरामद हुआ। पूछताछ में वह कोई जवाब नहीं दे पाया। जेल अधिकारियों ने मोबाइल को कब्जे में लेकर सेक्टर-49 थाना पुलिस को शिकायत दी। शक है कि राजन को जेल के अंदर ही किसी ने मोबाइल मुहैया करवाया है। पुलिस अब मोबाइल डाटा को खंगाल रही है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था।
सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कॉल इंटरनेट के जरिए की गई थी। बता दें कि राजन भट्टी पर पंजाब समेत चंडीगढ़ में डकैती, अपहरण, हत्या, आर्म्स एक्ट के करीब 15 मामले दर्ज हैं। वह मई 2015 में दुष्कर्म के आरोप में जिला अदालत में पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में थी। शहर के सेक्टर-9 में उसके छिपे होने की सूचना पर पहुंची पुलिस सर्च कर रही थी। इसी बीच तत्कालीन डीएसपी जगबीर सिंह पर उसने गोलियां चला दी थीं। साल 2016 में ऑपरेशन सेल ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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जेल में जैमर, फिर भी मोबाइल इस्तेमाल
बुडै़ल जेल में मोबाइल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के लिए जैमर लगाया गया है। इसके बावजूद राजन भट्टी फोन का कैसे इस्तेमाल कर रहा था। वहीं, सूत्रों का कहना है कि जैमर लगने से जेल कर्मचारी भी मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।
मोबाइल पहुंचाने में बिजलीकर्मी व वार्डर हो चुके हैं गिरफ्तार
जून 2018 में बुड़ैल जेल के बैरक नंबर-10 से राजन भट्टी के पास से तीन मोबाइल मिले थे। इस मामले में सेक्टर-49 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। वहीं, सितंबर 2020 में बैरक नंबर-10 में बंद रविंद्र उर्फ काली राजपूत, राजन भट्टी और प्रदीप सिंह के पास से तीन मोबाइल और एक सिम बरामद हुआ था। जांच में सामने आया था कि जेल में बिजली का काम करने वाले सुखचैन और जेल वार्डर चौकस की मिलीभगत से मोबाइल पहुंचाया गया था, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया था।
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