इसी बीच नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस समझौते पर आपत्ति जताई और कहा कि यह प्रदेश के हित में नहीं है, क्योंकि हरियाणा के पास पहले से ही पानी की कमी है। कांग्रेस विधायक रघुबीर कादियान समेत अन्य विधायकों ने इसे रद्द करने को लेकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कर दिया कि समझौता रद्द नहीं होगा। यमुना नदी में 18 हजार क्यूसेक पानी आता है। इसके अलावा 6 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी का प्रावधान किया है। अगर यमुना नदी में 24 हजार क्यूसेक से अधिक पानी होता है तो राजस्थान को दिया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि अभी यह केवल प्रस्ताव है, इस पर आने वाले दिनों में चर्चा होगी। 17 फरवरी को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत की अध्यक्षता में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल के बीच समझौता हुआ है। हथिनीकुंड बैराज पर पानी रोकने की क्षमता से अधिक पानी को राजस्थान को दिया जाएगा।
नहीं बनी एसवाईएल, 100 करोड़ का बजट
हर बार के बजट की तरह इस बार भी बजट में एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। पहले भी लगातार 100 करोड़ रुपये की ही राशि हर साल रखी जाती रही है। रावी-ब्यास नदी के पानी में हरियाणा के हिस्से का उपयोग करने के लिए सतलुज-यमुना लिंक नहर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी हरियाणा के हक में फैसला दे चुका है। साथ ही केंद्रीय जलशक्ति मंत्री की अध्यक्षता में पंजाब और हरियाणा की कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन पंजाब पानी देने को तैयार नहीं है।