कोरोना व लॉकडाउन से चंडीगढ़ के थियेटर कलाकार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। अक्तूबर आने को है लेकिन थियेटर बंद हैं। इससे नाटकों का मंचन नहीं हो रहा है। मगर कलाकार तमाम बंदिशों में भी कुछ न कुछ नया जरूर करता है। शहर के जाने-माने थियेटर कलाकर व सेवा ड्रामा रेपेट्री कंपनी के निदेशक जीएस चन्नी ने भी लॉकडाउन में बहुत कुछ नया सीखा और किया है।
उनका कहना है कि लॉकडाउन ने उन्हें वो सब सिखा दिया, जो शायद वह ताउम्र नहीं सीख पाते। लॉकडाउन से पहले शहरवासियों के चेहरे पर हंसी लाने वाले चन्नी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने कुकिंग सीख ली और तरह-तरह के लजीज व्यंजन बनाए। कामवाली नहीं आई तो घर में झाड़ू-पोंछा किया। लकड़ी के टेबल लैंप व स्टूल बना दिए। खाली समय में श्री गुरु नानक देव और कबीर को भी पढ़ा। जिससे काफी कुछ सीखने को मिला।
कलाकारों को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए
40 वर्षों से थियेटर से जुड़े चन्नी ने बताया कि कोरोना की वजह से कलाकारों पर संकट चल रहा है। लाचारी ने उनके हाथ बांध दिए हैं। यह एक ऐसा दौर है जिसमें, कलाकारों को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। यह समय है खुद को और तराशने और अपने आपको और बेहतर बनाने का है। कलाकार अपनी सोच बढ़ाएं कि किस तरह थियेटर को नया रूप दिया जा सकता है। अधिक से अधिक लोगों को थियेटर से जोड़ने की दिशा में काम करें।
जीएस चन्नी ने कहा कि कोरोना से उन कलाकारों पर सीधी मार मारी है, जिनकी रोजी रोटी सिर्फ थियेटर के जरिए ही चलती थी। ऐसे कलाकारों से मेरी अपील है कि भूख से मरना नहीं, बल्कि डटकर मुकाबला करना है। थियेटर बंद हैं तो कोई और काम धंधा करने में क्या शर्म। हम तो कलाकार हैं। हर फील्ड में कलाकारी दिखा सकते हैं। चन्नी के मुताबिक उनके साथ काम करने वाले दो कलाकार हैं, जिन्होंने अनलॉक के बाद ड्राइवरी का काम शुरू कर दिया है। कब तक दूसरों के सहारे रहेंगे।
अब तक 100 से ज्यादा कलाकारों को दिलाई पहचान
चन्नी शहर के एक जाने-माने कलाकार हैं। उन्होंने अपने हुनर के जरिए 100 से ज्यादा कलाकारों को थियेटर की बारीकियां सिखाई हैं। ये कलाकार अलग-अलग जगहों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। चन्नी एक वृत्तचित्र निर्माता, टीवी फिल्म निर्माता, अभिनेता, प्रख्यात रंगमंच व्यक्तित्व, नाटककार के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।
वह भारतीय रंगमंच विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा नई दिल्ली और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे के पूर्व छात्र रहे हैं। वह सामुदायिक रंगमंच के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।