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Chandigarh News: शराब में जिंदगी डुबो रहे पंजाब के युवा, नशे में ढूंढ रहे चंद मिनट का सुकून

Fri, 23 Dec 2022 08:30 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि नशा उन्मूलन केंद्र में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा पंजाब के युवा शामिल हैं। चंद मिनट के सुकून के लिए वे दोस्तों के साथ न चाहते हुए भी नशे का सेवन कर रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब के युवा अपनी जिंदगी शराब में डुबो रहे हैं। वे सब कुछ भुलाकर टल्ली हो रहे हैं। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा तादाद शराब पीने वालों की है। इसमें लड़कों के साथ लड़कियां भी शामिल हैं। इससे स्थिति चिंताजनक है। बचाव के उपाय होने के बावजूद उदासीनता है। परिणाम स्वरूप नशा अवसाद के साथ कई समस्याओं को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की लत के चलते युवा अपना और परिवार का भविष्य अंधेरे में डाल रहे हैं। तंबाकू व अन्य नशे का सेवन करने वालों की भी तादाद काफी ज्यादा है।

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दिखावे ने बना दिया नशे का आदी
पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि नशा उन्मूलन केंद्र में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा पंजाब के युवा शामिल हैं। चंद मिनट के सुकून के लिए वे दोस्तों के साथ न चाहते हुए भी नशे का सेवन कर रहे हैं। काउंसलिंग के दौरान खुलासा करते हैं कि न चाहते हुए भी कई बार स्टेटस मेंटेन रखने के लिए नशा करना पड़ता है। धीरे-धीरे वे आदी हो गए। वहीं कई युवा ऐसे हैं जो पढ़ाई में मेधावी होने के बावजूद नशे की लत के कारण करियर बर्बाद कर चुके हैं।

एक नशा नुकसान अनगिनत
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से पंजाब में किए गए सर्वे में नशे से होने वाली समस्याओं में खराब शैक्षणिक प्रदर्शन, स्कूल में अनुपस्थिति, संज्ञानात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याएं, परीक्षाओं में खराब ग्रेड, सीखने की क्षमता की कमी, खराब स्वास्थ्य, सुरक्षा के मुद्दे पर उदासीनता, सड़क दुर्घटनाएं, तनाव के कारण आत्मघाती विचार, एचआईवी, हैपेटाइटिस और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा, मानसिक बीमारियों का खतरा, उदासीनता, व्यक्तित्व विकार, स्मृति लोप, सामाजिक अलगाव और पारिवारिक संकट, स्कूल- कॉलेज से ड्रॉपआउट, पारिवारिक शिथिलता, घर में झगड़ा, किशोर अपराध प्रणाली का विस्तार, नौकरी में परेशानी, सहकर्मियों से पैसे उधार लेना या कर्मियों के बीच सम्मान की कमी, नौकरी छूटना, कोकीन जैसे पदार्थ से इलेक्ट्रिक ब्रेन से जुड़ी परेशानियां होना, मनोदशा विकार, हृदय, फेफड़े व यकृत की समस्या, आत्महत्या के विचार आना व अवसाद की गिरफ्त में आना शामिल है।

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नशा                        कुल उपभोक्ता          स्त्री/पुरुष               कुल आबादी
शराब                     11.61 प्रतिशत       21.58/0.58 प्रतिशत    2346775
तम्बाकू                      8.11प्रतिशत       14.78/0.73 प्रतिशत    1639764
दर्द निवारक दवाएं         0.83 प्रतिशत        1.50/0.09 प्रतिशत     167882
भांग                         0.30 प्रतिशत         सिर्फ पुरुष                60362
उत्तेजक पदार्थ              0.20 प्रतिशत       0.33/0.07 प्रतिशत      41405

सर्वे के दौरान पंजाब के जिलों में नशे के कुचक्र में फंसे युवाओं के प्रतिशत का आकलन करने के साथ उससे होने वाली विभिन्न समस्याओं पर भी फोकस किया गया है ताकि उससे जानकारी पाकर युवा वर्ग समय रहते सचेत हो जाएं। नशे की लत को छोड़ने के लिए स्वयं प्रयास कर आसानी से सफलता पाई जा सकती है। - प्रो. जेएस ठाकुर, पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग
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