गन्ना उत्पादक किसानों और पंजाब सरकार के बीच रविवार को चंडीगढ़ में हुई बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का एलान किया। स्टेट अशोर्ड प्राइस (एसएपी) को लेकर दोनों पक्षों में करीब 90 मिनट चली बैठक में सरकार अपने विशेषज्ञों की ओर से तय गन्ने के लागत मूल्य पर अड़ी रही, जबकि किसान संगठन अपने हिसाब से तय किए लागत मूल्य पर कायम रहे।
अधिकारियों ने गन्ने की उत्पादन लागत 350 रुपये बताई तो किसानों ने गन्ना उगाने में 388 रुपये खर्च आने का हिसाब उनके सामने रख दिया। किसानों ने यह भी तर्क दिया कि हरियाणा में गन्ने की उत्पादन लागत 358 रुपये तय की गई है। सरकार ने किसानों की मांग मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद बात उलझती देख सरकार ने सोमवार को जालंधर में विशेषज्ञों और किसानों की बैठक में उत्पादन लागत नए सिरे से निकालने का फैसला लिया।
सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सोमवार को जालंधर में 3.30 बजे फिर से बैठक बुलाई गई है। इसमें कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के विशेषज्ञ गन्ने की उत्पादन लागत पर फैसला लेंगे। बैठक में जो भी फैसला होगा, उसे मंगलवार को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। मंगलवार को ही सरकार की किसान संगठनों के साथ चंडीगढ़ में फिर से बैठक होगी।
सरकार ने गन्ना मिलों से बकाया दिलाने का दिया भरोसा
रविवार को बैठक के दौरान सरकार की तरफ से मौजूद अधिकारियों ने किसानों को 24 अगस्त को मुख्यमंत्री से मिलाने का भरोसा दिया और निजी चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों की बकाया राशि अगले 15 दिन में दिलाने को कहा है। अफसरों ने यह भी वादा किया कि सहकारी चीनी मिलों की तरफ गन्ना उत्पादकों के बकाया पैसे का भुगतान भी एक सितंबर तक कर दिया जाएगा।
मांगें न मानी तो संघर्ष तेज होगा : मनजीत सिंह
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों का धरना जारी रखने और रेल ट्रैक बंद रखने का एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बैठकों के बाद जो भी फैसला आएगा, उसके आधार पर ही किसान संगठन अपनी अगली रणनीति बनाते हुए आंदोलन के बारे में फैसला लेंगे। किसान नेता मनजीत सिंह ने कहा कि उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार निजी और सहकारी चीनी मिलों की तरफ गन्ना उत्पादकों का बकाया 200 करोड़ रुपये तुरंत जारी करे और गन्ने का दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।