नेशनल स्किन हॉस्पिटल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ विकास शर्मा का कहना है कि हालांकि इस फंगस से प्रभावित जो मरीज आ रहे हैं, जरूरी नहीं कि वे कोविड से संक्रमित हों। फेफड़े पर इसका असर होने के कारण लक्षण कोरोना से लगभग मिलते-जुलते होते हैं, जैसे सांस फूलना या कई बार सीने में दर्द। इसके अलावा कई दूसरे लक्षण भी दिखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि नाक के साथ मुंह की सफाई भी विशेष तौर पर की जाए। मास्क प्रयोग करने के बाद मुंह, दांत और जीभ को अच्छी तरह साफ करने के बाद ही कुछ खाया या पीया जाए। दूध पीने वाले बच्चों के स्तर पर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
डॉक्टर विकास का कहना है कि संक्रमण अगर शरीर के जोड़ों पर असर करे तो उनमें दर्द होने लगता है। दिमाग तक पहुंचा तो सोचने विचारने की क्षमता पर असर दिखता है। त्वचा में रक्त के जरिए फैलने पर छोटे-छोटे फोड़े हो सकते हैं, जिनमें आमतौर पर दर्द नहीं होता है। ये संक्रमण का शुरुआती लक्षण है।
जीएमएसएच 16 के ईएनटी विभाग के पूर्व प्रभारी डॉ राजेश कुमार धीर का कहना है कि फेफड़ों पर असर होने पर कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर कई बार लोग बगैर जांच के खुद को कोरोना संक्रमित मान लेते हैं और घर पर ही दवाएं करने लगते हैं, इससे स्थिति बिगड़ जाती है।
संक्रमण शरीर के मुख्य अंगों को अपनी चपेट में ले लेता है और मरीज के अंग फेल होने से मौत भी हो सकती है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें ये संक्रमण हो सकता है अगर वे संक्रमित वनस्पतियों या फिर दूषित पानी के संपर्क में आएं। इसके अलावा कोविड संक्रमित गंभीर मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन चढ़ाई जा रही हो, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है, अगर नाक या मुंह पर लगे उपकरण फंगलयुक्त हों। इसके अलावा उन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है जो डायबिटीज के मरीज हैं, या फिर लंबे समय तक स्टेरॉयड ले रहे हैं।