पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मिसयूज और वॉयलेशन पर पेनल्टी को लेकर चंडीगढ़ इस्टेट रूल्स 2007 और संशोधित 2009 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में राहत दी है। हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि याचिका लंबित रहते प्रशासन इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगा।
इस संबंध में दाखिल अलग-अलग याचिकाओं में सीनियर एडवोकेट विकास बहल व पारस मनी गोयल के माध्यम से कहा गया कि एक्ट में मिसयूज और वॉयलेशन के लिए प्रशासन ने 500 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी का प्रावधान किया है।
चंडीगढ़ प्रशासन 500 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी पिछली अलॉटमेंट पर भी वसूल कर रहा है, जो सही नहीं है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा था कि क्यों न उस रूल्स को ही खत्म कर दिया जाए, जिसके तहत मिसयूज और वॉयलेशन की पेनल्टी लगाई जा रही है।
याचिकाओं में कहा गया कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट में संशोधन के बिना पेनल्टी को बढ़ाया नहीं जा सकता। एक्ट में संशोधन का अधिकार संसद को है। मंगलवार को प्रशासन की तरफ से एक बार फिर समय दिए जाने की मांग की गई।
प्रशासन की तरफ से कहा गया कि वे 2007 के नियमों को लेकर विचार कर रहे हैं। खंडपीठ ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन के रवैये से हाईकोर्ट खुश नहीं है। बीते साल से प्रशासन इस मामले में विचार के लिए समय ही मांग रहा है, जबकि कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। हाईकोर्ट ने कहा कि अब इस मामले मे राहत दिया जाना जरूरी हो गया है।