चंडीगढ़। चंडीगढ़ को पूर्ण यूटी बनाने के मुद्दे पर पार्षदों के दिल का गुबार भी फूटा। भाजपा पार्षद दिलीप शर्मा ने कहा कि जब हरियाणा-पंजाब कोई फंड नहीं देते तो चंडीगढ़ में हिस्सा कैसा। केंद्र से जो फंड आता है, उसे दोनों राज्य आपस में बांट लेते हैं। पीयू में प्रवेश के लिए केंद्रीय प्रणाली अपनाई जाती है, उसमें भी हमारे बच्चों का हिस्सा दोनों राज्य ले लेते हैं। नौकरी में भी इन दोनों राज्यों के अधिकारियों का दबदबा है। सुनने में आया है कि पुलिस विभाग में तो एक गांव के कई लोगों तक को भर्ती कर लिया गया था। ऐसे में चंडीगढ़ का अधिकार क्यों मारा जा रहा है। इस बीच आप के पार्षद कुलदीप कुमार ने कहा कि अधिकारी भी अपने बच्चों को ही पढ़ाते हैं, इसमें गलत क्या है। इस पर दिलीप शर्मा ने कहा कि आप के पार्षद सदन में ऊंची आवाज में बोलकर गुंडागर्दी कर रहे हैं। इस पर कुलदीप ने कहा कि यह गुंडागर्दी है तो आयुक्त के पर्सनल सेक्रेटरी को थप्पड़ मारना क्या था। उस पर कोई जवाब क्यों नहीं देता।
वहीं, भाजपा पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि जब चंडीगढ़ में कोई समस्या हुई तो पंजाब और हरियाणा मदद के लिए नहीं आए, फिर दोनों राज्य किस बात का हिस्सा मांग रहे हैं। पंजाब को चंडीगढ़ के हाथों में सौंपकर क्या हम सिटी ब्यूटीफुल को ड्रग माफियाओं के हाथों में देना चाहते हैं। यह एजेंडा हमारे बच्चों के भविष्य का है। पंजाब और हरियाणा के कैडर हैं, चंडीगढ़ कैडर कहां गया। हमें राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। आप पार्षद प्रेमलता ने कहा कि पंजाब के साथ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने भी चंडीगढ़ में हिस्सेदारी मांगी है। फिर भाजपा केवल पंजाब पर सवाल क्यों उठा रही है। इस पर भाजपा पार्षदों ने कहा कि आप इसमें हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को भी जोड़ लें। भाजपा पार्षद कंवरजीत राणा ने कहा कि स्पोर्ट्स कोटे से भी चंडीगढ़ में यहां के बच्चों को स्कूल व कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता है क्योंकि पंजाब और हरियाणा हमारा हक मार देते हैं। फिर महंगी फीस में हमारे यहां के बच्चे पंजाब और हरियाणा में दाखिला लेते हैं। भाजपा पार्षद जसमनप्रीत ने कहा कि विपक्ष बेशक इस एजेंडे को राजनीतिक बताए, लेकिन यह 13 लाख लोगों के मन की बात है। जिसे सदन में रखा गया है। वहीं, आप पार्षद योगेश ढींगरा ने कहा कि भाजपा सांसद केंद्र में हैं, फिर सीधे वहां प्रस्ताव क्यों नहीं लेकर जाते हैं। यह मुद्दा हरियाणा और पंजाब में चल रहा है, हम यहां क्यों इस पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि चंडीगढ़ को फुटबॉल न बनाया जाए। जो लोग मेहनत करके डीएसपी बनते हैं उनका क्या कसूर है कि वह उससे आगे बढ़ ही नहीं पाते, लेकिन पानी के एजेंडे पर हमसे कहा कि प्रशासन के खिलाफ प्रस्ताव नहीं ला सकते हैं, तो केंद्र का मुद्दा यहां कैसे ले आए। इसका मतलब पहले जनता को गुमराह किया गया। भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि 18 अप्रैल 1966 को एक कानून बना था जिसमें दो यूटी बनीं एक चंडीगढ़ और दूसरी हिमाचल प्रदेश। इस कानून को कांग्रेस लेकर आई, फिर इसमें हिस्सेदारी की बात कहां से आ गई।