चंडीगढ़। शहर में कलेक्टर रेट बढ़ाने का विरोध तेज हो गया है। चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन का कहना है कि इससे शहर का विकास थम जाएगा। यहां तक की आशियाना बनाना अब यहां के लोगों के पहुंच से दूर हो जाएगा। सिर्फ दिल्ली, मुंबई या फिर एनआरआई धनाढ्य ही ले पाएंगे चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी
चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन ने प्रेस क्लब में शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान यह बातें कही। संगठन ने इसको तानाशाही फैसला बताया। उनकी दलील थी कि एक ओर शेयर वाइस रजिस्ट्री रोक कर चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी मार्केट को पहले ही रौंद दिया गया था। करीब 700 करोड़ रुपए की रजिस्ट्री रोकी गई है।
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तानाशाही रवैया से खराब हो रही स्थिति संगठन के अध्यक्ष कमल गुप्ता ने बताया कि चंडीगढ़ गजब की प्लानिंग की वजह से पूरे भारत में लोगों की पहली पसंद है। लेकिन कुछ अफसरों के तानाशाही रवैया की वजह से यहां की स्थिति खराब होती जा रही है।
128 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है
एसोसिएशन के जुड़ेे लोगों ने बताया कि शहरी इलाके में बढ़ा कलेक्टर रेट 42% से 128% तक बढ़ाया गया है। प्लॉटेड डेवलपमेंट के लिए मौजूदा कलेक्टर रेट 70,424 रुपये प्रति वर्ग गज से 78,250 रुपये प्रति वर्ग गज के बीच है, लेकिन प्रस्तावित दर 1,28,200 रुपये प्रति वर्ग गज से 1,78,600 रुपये प्रति वर्ग गज तक होगी। इसके अलावा ग्रामीण इलाकेे में आवासीय कलेक्टर रेट में 316% और वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए 438% की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। प्रेस वार्ता के दौरान कहा गया कि चंडीगढ़ की जनता जवाब मांग रही है कि क्या इस रेट पर चंडीगढ़ प्रशासन का कोई भी अधिकारी शहर में प्रॉपर्टी खरीद कर सकते हैं।