चंडीगढ़। भारत नवाचार, कौशल विकास और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के बल पर वर्ष 2047 तक एक वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह बात अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमैन प्रो. टीजी सिथाराम ने कही। वे आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेज चंडीगढ़ की ओर से आयोजित एआई एंड द फ्यूचर ऑफ मैन-मशीन कोलेबोरेशन विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अंशु कटरिया ने की। प्रो. सिथाराम ने कहा कि एआई फॉर ऑल एंपावरिंग माइंड्स, ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स भविष्य की दिशा तय करने वाला मंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्ता की शक्ति केवल मशीनों या कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना होगा, ताकि एक अधिक बुद्धिमान, न्यायपूर्ण और समावेशी विश्व का निर्माण किया जा सके। जो राष्ट्र अपने नागरिकों को स्वतंत्र सोचने, निरंतर सीखने और नैतिक आचरण के लिए प्रेरित करेंगे, वही भविष्य में नेतृत्व करेंगे।