चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल की सुंदरता प्रवासी पक्षियों को रास नहीं आ रही है। साल दर साल इनकी संख्या घट रही है। इस साल 335 जलीय प्रवासी पक्षी चंडीगढ़ पहुंचे। वहीं, प्रवासी पक्षियों की 73 प्रजातियां ही आई हैं। ये जल, थल और पेड़ों पर निवास करते हैं। लगातार घटती प्रवासी पक्षियों की संख्या से चिंता बढ़ने लगी है।
चंडीगढ़ बर्ड क्लब के अध्यक्ष एमएस सेखों ने बताया कि 12 नवंबर को बर्डमैन डॉ. सलीम अली का जन्मदिन होता है। इसके आसपास शहर के जलाशयों में प्रवासी पक्षियों का सर्वे किया जाता है। यह सर्वे ऐसी जगह किया जाता है, जहां जलाशयों के साथ जंगल भी हों, ताकि जलीय पक्षी के साथ मैदान और वृक्षों के प्रवासी पक्षियों की गिनती की जा सके। इस बार 6 टीमों के 34 सदस्यों ने पक्षियों का सर्वे किया। तीन टीमों को छतबीड़ के पीछे घग्गर नदी, सिसवां और मिर्जापुर बांध भेजा गया। इसके अलावा कुछ टीमें सुखना और धनास की लेक पर पहुंचीं। इस दौरान देखा गया कि पिछले साल की तुलना में पक्षी काफी कम हैं। पिछले साल 429 जलीय पक्षी पहुंचे थे।
2017 के बाद से कम हो रहे प्रवासी
एमएस सेखों ने बताया कि वह पिछले 12 साल से यह सर्वे कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले पक्षियों की संख्या 3 हजार से ज्यादा होती थी। उसके बाद लगातार पक्षियों की संख्या घट रही है। वर्ष 2017 में जलीय पक्षी 717 और कुल प्रजाति 91, वर्ष 2018 में जलीय पक्षी 417 और कुल प्रजाति 98, वर्ष 2019 में जलीय पक्षी 620 और कुल प्रजाति 86, वर्ष 2020 में जलीय पक्षी 429 और कुल प्रजाति 73 थी।
ज्यादा बारिश से भी प्रभावित होते हैं पक्षी
एमएस सेखों ने बताया कि चंडीगढ़ में छोटे पक्षी, साइबेरियन और हिमालय से पक्षी आते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिस वर्ष ज्यादा बारिश होती है, उस वर्ष पक्षी भी कम ही आते हैं। क्यों कि इन पक्षियों को खाना जलाशयों के छोर पर ही मिलता है। जब जलाशय पूरे भरे होते हैं तो पक्षियों के लिए खाने के लिए उपयुक्त भोजन नहीं मिल पाता है। ऐसे में वह आकर जल्द लौट जाते हैं या आते ही नहीं हैं।