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पंजाब में आतंकियों ने बदला तरीका: अब तालिबानी ढंग से कर रहे अटैक, आरपीजी हमले रोकने का नहीं कोई मैकेनिज्म

Sat, 10 Dec 2022 11:03 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

1980 से 1995 के बीच डेढ़ दशक के दौरान आतंकवाद के कारण पंजाब में कुल 21,532 लोग मारे गए। इनमें 8,090 अलगाववादी, 11,796 आम लोग और 1,746 सुरक्षाकर्मी थे।
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तरनतारन में हमला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पंजाब में आतंकवाद के काले दौर को फिर से जीवित करने की कोशिशों में जुटे आतंकियों ने इस बार आतंक फैलाने के तरीके में फेरबदल कर लिया है। मोहाली में इंटेलिजेंस विंग की इमारत और अब तरनतारन जिले में पुलिस थाने पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) से किया गया हमला इस बात का संकेत है कि आतंकी एके-47 या एके-56 और हैंड ग्रेनेड जैसे हथियारों से सीधे और करीब से हमला करने की रणनीति छोड़कर हवाई रास्ते से हमले को तरजीह देने लगे हैं। 
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हमले का यह तरीका तालिबान आतंकियों से मिलता-जुलता है, जो सीधे लड़ने के बजाय रॉकेट लांचरों के जरिये दूरी से वार करते रहे हैं। उधर, पाकिस्तान से पंजाब में हथियारों और बमों की सप्लाई भी अब जमीन मार्ग से नहीं बल्कि ड्रोनों की मदद से की जाने लगी है।

गौरतलब है कि 1980 से 1995 के बीच डेढ़ दशक के दौरान आतंकवाद के कारण पंजाब में कुल 21,532 लोग मारे गए। इनमें 8,090 अलगाववादी, 11,796 आम लोग और 1,746 सुरक्षाकर्मी थे। इसके बाद सूबे में अमन-शांति भंग करने की कोशिशों का अगस्त 2019 में खुलासा हुआ, जब पाकिस्तान द्वारा पंजाब में ड्रोन के जरिये हथियार, विस्फोटक और आईईडी गिराए जाने का मामला सामने आया। इससे अगले साल बीएसएफ ने एके सीरीज के राइफल और पिस्तौल समेत 34 हथियार, 3322 चक्र गोला-बारूद, 485 किलो हेरोइन बरामद की। 
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जनवरी 2021 में पहली बार पंजाब पुलिस ने ड्रोन द्वारा गिराए गए एक ‘अंडर बैरेल ग्रेनेड लॉन्चर, 3.79 किलो आरडीएक्स और टिफिन बम बरामद किए। माना जा रहा है कि पाक से ग्रेनेड लांचर की यह पहली आमद थी। इसके बाद ऐसे कितने हथियार पंजाब पहुंच चुके हैं, उसका रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। 

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि राज्य पुलिस के पास फिलहाल आरपीजी हमले रोकने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। आतंकियों के इशारे पर पंजाब में उनके स्लीपरों ने दो बार टिफिन बम का इस्तेमाल भी किया लेकिन आईईडी ब्लास्ट का अनुभव न होने के चलते दोनों बार इन बमों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
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