बुडै़ल जेल ब्रेक मामले में तिहाड़ जेल में बंद आतंकी जगतार सिंह हवारा को पुलिस ने बीमारी के चलते अदालत में पेश नहीं किया। तिहाड़ जेल प्रशासन ने बुधवार को सीजेएम अनुभव शर्मा की अदालत में पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की।
जेल प्रशासन ने कहा कि पीठ में दर्द के कारण उसे डाक्टरों ने सफर करने से मना किया है। सुरक्षा के चलते हवारा और भ्यौरा को एक साथ पेश किया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों के धारा 313 (बचाव पक्ष के बयान) दर्ज कराए गए।
अमृतसर जेल में बंद आतंकी नारायण सिंह चौरा ने बयानों में कहा कि पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया है। हवारा और भ्यौरा के भागने के समय बुडै़ल जेल की बिजली बंद नहीं की गई थी। जेल के तत्कालीन जेल सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा ने बताया उसे गलत फंसाया गया है। वे तो जेल मैनुअल के तहत अपनी ड्यूटी कर रहे थे।
हरिंद्र पाल सिंह ने बताया उसका जेल ब्रेक से कोई लेना देना नहीं है। पुलिस ने अपना केस सुलझाने के लिए जबरदस्ती फंसाया है। जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डीएस संधू ने कहा कि आतंकी भूख हड़ताल करके अपनी शर्त मनवाते थे। उन्होंने प्रशासन को आतंकियों के भागने के संबंध में पत्र लिखा था।
साथ ही उन्हें नाभा जेल में शिफ्ट करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुपरिंटेंडेंट पीएस राणा, गुरमेल सिंह, लखविंदर सिंह, सुबेग सिंह, नंद सिंह, गुरमेल सिंह निशान सिंह, इंद्र सिंह और नंद सिंह मौजूद थे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की है।
क्या था मामला
गौरतलब है कि 24 फरवरी 2004 को मामला दायर किया गया था। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में पकड़े गए आतंकी जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा बुडै़ल जेल में बंद थे। तीनों आतंकियों ने अपनी बैरक से बाहर तक सुरंग खोदकर भाग गए थे।
साथ हत्यारोपी देवी भी भागने में सफल रहा था। सेक्टर-34 थाना पुलिस ने आतंकियों और बुडै़ल जेल कर्मचारियों समेत 21 लोगों पर मामला दर्ज किया था। कुछ महीनों के बाद दिल्ली पुलिस ने जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा को दिल्ली स्थित एक सिनेमा हाल में ब्लास्ट के मामले में दबोच लिया था। जबकि, जगतार सिंह तारा और देवी का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी। बम ब्लास्ट मामले की सुनवाई के चलते दोनों आतंकियों को तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया है।