चंडीगढ़। मोस्ट वांटेड आतंकी गोल्डी बराड़ विदेश में बैठकर आतंक का नेटवर्क चला रहा है। शहर के कोयला कारोबारी के घर पर फायरिंग और तीन करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में गोल्डी बराड़ को नामजद किया गया है। इस मामले में उसके दो साथी अमृतपाल उर्फ गुज्जर और कमलप्रीत सिंह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के रिमांड पर हैं। एनआईए ने अब इन दोनों पर यूएपीए-43डी धारा भी लगा दी है, जिसके चलते अब इन्हें अग्रिम जमानत मिलनी भी मुश्किल हो गई है।
दरअसल, मोहाली निवासी अमृतपाल उर्फ गुज्जर और कमलप्रीत सिंह को कुछ महीने पहले चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-5 निवासी कोयला कारोबारी की कोठी पर फायरिंग व 3 करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार किया था। मामला आतंकी गोल्डी बराड़ से जुड़ा तो जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एनआईए दोनों आरोपियों को भी पहले रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। अब आतंकी गतिविधियों में इनकी संलिप्तता पाए जाने पर फिर से दोनों को चार दिन के रिमांड पर लिया है।
एनआईए ने सीबीआई कोर्ट के सामने खुलासा किया कि अमृतपाल और कमलप्रीत की संलिप्तता आतंकी गतिविधियों के साथ नशा तस्करी के बड़े मामलों में है इसलिए उनके खिलाफ पहले दर्ज मामले में यूएपीए की धारा 43-डी (2)(ए) भी लगाई गई है। इस धारा के तहत अमृतपाल सिंह की पुलिस हिरासत 11 दिन और कमलप्रीत सिंह की कुल 19 दिन लंबित है। एनआईए ने कोर्ट में दावा किया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि आरोपी अमृतपाल को गोल्डी बराड़ नशीले पदार्थों की आय का कुछ हिस्सा जमा करने के निर्देश के साथ क्यूआर कोड और बैंक खाते भेजता था। इसके अलावा वह आतंकी फंड और नशीले पदार्थों की आय को चैनलाइज करने के लिए बराड़ द्वारा दिए गए बैंक खाते में धनराशि जमा करने के लिए अपने दोस्त के बैंक खाते का इस्तेमाल करता था। संवाद
हवाला के जरिए भी विदेश भेजते थे रकम :
एनआईए ने जांच रिपोर्ट में यह खुलासा भी किया है कि आरोपी कमलप्रीत, अमृतपाल के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ है और वह आतंकी फंडिंग में उसकी मदद करता है। कमलप्रीत नशीली दवाओं व नशीले पदार्थों से अर्जित आय को चैनलाइज करने का काम करता था। हालांकि अभी इन आरोपियों ने उन लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया है, जो बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। यह दोनों बड़ी रकम को क्यूआर कोड या बैंक खाते के अलावा हवाला के जरिए भी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ तक पहुंचाने का काम करते थे। हालांकि हवाला वाली चैन तोड़ने के लिए आरोपियों से पूछताछ जारी है। इस मामले की जांच एनआईए की डीएसपी प्रीत इंदर कौर विर्क द्वारा अपनी टीम के साथ की जा रही है।
गैर जमानती एक्ट है यूएपीए :
यूएपीए एक्ट की धारा 43(डी) 2(ए) लगने के बाद आरोपी को जमानत नहीं मिलती। यह एक्ट गैर जमानती होता है। इस तरह के मामलों में आरोपी को अग्रिम जमानत देने का भी प्रावधान नहीं है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद और आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआई) को सभी जरूरी अधिकार प्राप्त होते हैं, जिससे वह अपने कार्य को बिना किसी रुकावट के कर सकती है। इस एक्ट में आरोपी की पुलिस कस्टडी की अवधि दोगुना करने का भी प्रावधान है जिसके तहत जांच टीम को इसके तहत 30 दिन तक की कस्टडी मिल सकती है। अन्य कानूनों की अपेक्षा इसमें न्यायिक हिरासत 30 दिन ज्यादा यानी 90 दिन की भी हो सकती है जबकि सामान्य तौर पर न्यायिक हिरासत केवल 14 दिन की ही होती है।