चंडीगढ़। आखिरकार 56 दिन बाद ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए धरने पर बैठे विद्यार्थियों की मांग को पीयू प्रशासन ने सोमवार को मान लिया है। लिखित में इसे लाने का आश्वासन दिया है। कुलपति प्रो. रेणु विग ने प्रो. अशोक समिति की दी पहली दो सिफारिशों-भर्ती और दाखिला प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण लागू करने और 2011 के एमएचआरडी पत्र के तहत भर्ती में 27 प्रतिशत आरक्षण देने को रेगुलेशन समिति को भेज दिया है।
धरने पर बैठे एसएफएस छात्र संगठन की ओर से सोमवार को पीयू प्रशासन का पुतला फूंकने की बात कही गई थी। सुबह 11 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन में विद्यार्थी, प्रोफेसर और अन्य संस्थाओं से जुड़े सदस्यों ने ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग सामने रखी। मौके पर आकर रजिस्ट्रार प्राे. याजवेंद्र पाल वर्मा ने लिखित में विद्यार्थियों की मांग मानने की बात कही। उनके द्वारा लाए पत्र में जिक्र किया कि कुलपति प्रो. रेणु विग ने ओबीसी आरक्षण को लेकर समिति की सिफारिशों को रेगुलेशन समिति को सौंप दिया, जिसमें दो मांगें रही। पहली यह कि दाखिला और भर्ती प्रक्रिया में बीसी-ओबीसी आरक्षण नीति जल्द लागू की जाए। दूसरी पीयू को 21 अक्तूबर 2011 को शिक्षा मंत्रालय से मिले दिशा-निर्देश के तहत 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण दिया जाए। लेकिन समिति सदस्यों द्वारा इसमें सुझाव दिया है कि पीयू में पंजाब राज्य की भागीदारी को देखते हुए 27 प्रतिशत में से 12 प्रतिशत आरक्षण राज्य के बीसी अभ्यर्थियों के लिए हो।
विद्यार्थियों को दिए आश्वासन पत्र में तीसरी सिफारिश न होने पर भड़के शिक्षक :
समिति ने पीयू प्रबंधन को आरक्षण को लेकर तीन सिफारिशें दी थीं लेकिन आश्वासन के लिए दिए लिखित आश्वासन में तीसरी सिफारिश का जिक्र नहीं है। समिति की तीसरी सिफारिश थी कि पीयू द्वारा 2022 में जारी विज्ञापन के तहत की जा रही शिक्षक भर्ती में ओबीसी की 27 प्रतिशत सीटों को आगे की दो भर्तियों में जोड़ा जाए, जिसके लिए 2023 और 2024 में विज्ञापन जारी किए हैं। रजिस्ट्रार ने मौखिक रूप से इस मांग को पूरा करने की बात कही। प्रो. अशोक समिति के सदस्य रहे प्रो. सुधीर ने लिखित में सिफारिश का जिक्र न करने पर रोष व्यक्त किया, जिस पर रजिस्ट्रार का पारा भी बढ़ गया। दोनों में तीखे शब्दों की तकरार के बाद रजिस्ट्रार लिखित आश्वासन देकर वहां से निकल गए।