चंडीगढ़। पीयू में पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने शिक्षकों के साथ मिलकर सोमवार को प्रशासनिक ब्लॉक के सामने धरना देते हुए रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने बताया कि सरकारें शिक्षकों के धैर्य का इम्तिहान ले रही हैं, लेकिन वे सातवें वेतनमान की मांग मनाए बगैर पीछे नहीं हटेंगे। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षा बंद धरने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, लेकिन सरकारों ने शिक्षा को एकदम नकार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार विद्यार्थियों की परीक्षा में देरी करवा रही है। शिक्षकों ने प्रदर्शन से पहले रविवार को कोरोना संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले कानून विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल ठाकुर को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शिक्षकों ने दो मिनट का मौन धारण किया।
पुटा अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि पंजाब सरकार शिक्षकों का धैर्य जांच कर रही है, लेकिन शिक्षक शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होकर जंग जारी रखेंगे। उन्होंने पीयू के शिक्षकों की ओर से एकजुटता दिखाने के लिए उनके प्रयास की सराहना की। पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों की ओर शिक्षा बंद करने के कारण सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ साथ संबद्ध सभी कॉलेजों के शिक्षक भी धरने पर हैं, ऐसे में बिना शिक्षकों के परीक्षा करवाना संभव नहीं है। हालांकि शिक्षकों की ओर से कई बार सरकार के प्रतिनिधियों से मिलकर विद्यार्थियों की परीक्षा नहीं होने के कारण शिक्षा के हो रहे नुकसान से अवगत करवाया गया है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
डीएवी में आज से महिलाएं बैठेंगी भूख हड़ताल पर
डीएवी कॉलेज-10 में सातवां वेतनमान की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल सोमवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान डीएवी के डॉ. श्रुति मरिया, डॉ. कविता आनंदी, डॉ. मोनिका चोपड़ा, डॉ. सपना जैन और एसजीजीएसडब्ल्यू-26 की डॉ. हरनीत कौर भूख हड़ताल पर बैठीं। शाम 5 बजे से लेकर मंगलवार सुबह 9 बजे तक डॉ. नवनीत कुमार प्रुथी, डॉ. कर्ण सिंह विनायक और डॉ. प्रो गगन जोसन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। डॉ. सुमित सकलानी ने बताया कि चूंकि सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है, इसलिए अब महिला शिक्षिकाएं मंगलवार से 24 घंटे चल रही भूख हड़ताल में बैठेंगी। इसके साथ ही एसडी कॉलेज-32 में शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन किया, जिसमें विभिन्न कॉलेजों के करीब 150 शिक्षक मौजूद रहे।