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Chandigarh News: पंजाब में नल का पानी भी सुरक्षित नहीं, 21 फीसदी सैंपल फेल

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-फाजिल्का, बरनाला, गुरदासपुर, फिरोजपुर और बठिंडा में हालात सबसे खराब
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-जलशक्ति मंत्रालय की घरेलू नल कनेक्शन कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट
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राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब में पीने के पानी की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। जलशक्ति मंत्रालय की घरेलू नल कनेक्शनों की कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार राज्य में नल से आपूर्ति होने वाले पानी के 21 फीसदी सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसके साथ ही 12.2 प्रतिशत उपभोक्ता पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं। रिपोर्ट में फाजिल्का, बरनाला, गुरदासपुर, फिरोजपुर और बठिंडा को सबसे अधिक प्रभावित जिले बताया गया है।



रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में कुल 79 प्रतिशत सैंपल पास हुए हैं, जबकि 21 प्रतिशत फेल रहे। फाजिल्का में हालात सबसे खराब हैं, जहां महज 52 प्रतिशत सैंपल ही मानकों पर खरे उतरे। बरनाला में 56 प्रतिशत, गुरदासपुर में 67.1 प्रतिशत, फिरोजपुर में 68.9 प्रतिशत और बठिंडा में 70 प्रतिशत सैंपल पास पाए गए। पहले से ही भूजल में भारी धातुओं की मौजूदगी से जूझ रहे पंजाब के लिए नल के पानी में भी खामियां सामने आना सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।
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कहां बेहतर, कहां बदतर

रिपोर्ट में कुछ जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर भी बताई गई है। एसबीएस नगर में 94 प्रतिशत सैंपल पास हुए, जबकि संगरूर (93.1%), पठानकोट (92.5%), लुधियाना (91%) और मोहाली (88.3%) में भी पानी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत ठीक पाई गई। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ जिलों में बेहतर आंकड़े पूरे राज्य की तस्वीर नहीं बदलते। हाल के दिनों में अन्य राज्यों में दूषित पानी से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की घटनाओं के बाद, पंजाब में भी एहतियात की जरूरत और बढ़ गई है।



राष्ट्रीय औसत से पीछे पंजाब

पानी की गुणवत्ता को लेकर संतुष्टि के मामले में भी पंजाब राष्ट्रीय औसत से पीछे है। जहां देशभर में 92.4 प्रतिशत लोग पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट हैं, वहीं पंजाब में यह आंकड़ा 87.8 प्रतिशत है। गुरदासपुर में केवल 67.1 प्रतिशत और बरनाला में 72.1 प्रतिशत लोग ही पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट पाए गए। इसके अलावा मलेरकोटला (75.6%), संगरूर (76.6%) और मानसा (77.1%) में भी असंतोष का स्तर अधिक है।



प्रेशर और नियमित आपूर्ति भी समस्या

सर्वे में यह भी सामने आया कि केवल गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था भी चिंता का कारण है। 8.3 प्रतिशत लोग पानी के कम प्रेशर से असंतुष्ट हैं, जबकि 6.8 प्रतिशत उपभोक्ताओं को नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं मिल रही। लोगों का कहना है कि सबसे गंभीर समस्या दूषित पानी है, जिसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
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बीमारियों को न्योता दे रहा दूषित पानी

विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी से हैजा, दस्त, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही पानी में मौजूद यूरेनियम और फ्लोराइड जैसी भारी धातुएं लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं। प्रदेश में पीने के पानी की जांच के लिए 33 प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें से 31 एनएबीएल मान्यता प्राप्त हैं। इसके बावजूद कई जिलों में यूरेनियम और फ्लोराइड की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई जा रही है।
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