25 साल पहले एसवाईएल नहर के लिए एक्वायर की गई जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को न चुकाने के मामले में जिला अदालत ने कड़ा नोटिस दिया। अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में पंजाब सरकार के खजाने के मुख्य हेड नंबर 2052 को अटैच करने के आदेश दिए हैं।
इस हेड से राज्य सरकार के मुलाजिम व अधिकारियों को वेतन एवं अन्य खर्चे दिए जाते हैं। लेकिन अब इस हेड से सिर्फ अधिकारियों और मुलाजिमों को वेतन ही मिल सकेगा। जबकि अन्य खर्चों पर अदालत ने पूरी तरह रोक लगा दी है। यह फैसला जिला अतिरिक्त सेशन जज तरसेम मंगला ने सुनाया है।
जानकारी के मुताबिक एसवाईएल नहर बनाने के लिए 1990-91 में गांव मानकमाजरा की जमीन सरकार ने अधिगृहीत की थी। इस दौरान बलदेव, गुरदेव सिंह और छोटा सिंह व अन्य की जमीन एक्वॉयर हुई थी। किसानों को प्रति एकड़ जमीन के बदले पचास हजार के करीब मुआवजा दिया गया था।
मुआवजा कम मिलने के कारण किसान रोपड़ अदालत में चले गए थे। अदालत ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया, साथ ही मुआवजा प्रति एकड़ बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया। लेकिन किसानों को यह मुआवजा भी कम लगा। इसके बाद वे मामले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में ले गए।
हाईकोर्ट ने 2012 में मुआवजा बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया। लेकिन, संबंधित विभाग ने किसानों को पैसे नहीं दिए। 11 मार्च 2013 को किसानों ने बढ़े हुए पैसे लेने के लिए फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने संबंधित विभाग को समन भेजकर जवाब देने को कहा। विभाग के अधिकारी ने अदालत में पेश होकर जवाब दिया कि किसानों का बकाया पैसा फाइनेंस विभाग से आना है।
विभाग से पैसा आने के बाद किसानों को भुगतान किया जा सकता है। उसके बाद भी किसानों को बीस लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार के खजाने के मुख्य हेड नंबर 2052 की कुर्की के आदेश जारी किए हैं।
इन्हें भी 18.50 लाख का भुगतान नहीं किया
इसी तरह दूसरा मामला गांव वासिया का है। गांव निवासी अमरीक सिंह व अन्य की जमीन भी 25 साल पहले नहर के लिए एक्वायर हुई थी। इसका भी बढ़ा हुआ मुआवजा 18.50 के करीब बनता है। सरकार की ओर से इसका भी भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते सरकार के खजाने को अटैच करने के आदेश दिए गए हैं।