मानवाधिकार सेल में तैनात रहे पंजाब पुलिस के निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) मालविंदर सिंह सिद्धू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मोहाली में दर्ज केस में जमानत मिलते ही विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें धोखाधड़ी व रिश्वत के केस में गिरफ्तार कर लिया। उन पर धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और रिश्वत लेने के आरोप में विजिलेंस ने दो दिन पहले केस दर्ज किया था। शनिवार को आरोपी अधिकारी को मोहाली अदालत में पेश किया गया।
अदालत में दलीलें सुनने के बाद आरोपी अधिकारी को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी खाद्य सिविल सप्लाई और उपभोक्ता मामले विभाग का ड्राइवर कुलदीप सिंह व पटियाला जिले के गांव आलमपुर का निवासी बलबीर सिंह अभी पकड़ से बाहर हैं।
आरोप है कि एआईजी सिद्धू के कहने पर दोनों आरोपी सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतें देते थे। बाद में ब्लैकमेलिंग और नाजायज लाभ लेकर शिकायतें वापस ले लेते थे। विजिलेंस ने इस मामले में 6 अक्तूबर को जांच शुरू की थी। इसके बाद मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि 2017 से मानवाधिकार सेल में बतौर एआईजी के तौर पर सेवा निभा रहे मालविंदर सिंह सिद्धू ने पिछले पांच वर्षों में कभी भी विजिलेंस में एआईजी और आईजी के पदों पर काम नहीं किया लेकिन खुद विजिलेंस अधिकारी बनकर परेशान करता था। इसके अलावा एक अधिकारी को परेशान कर उसने पांच लाख तक वसूले थे।
इसके अलावा उन पर सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग समेत कई आरोप हैं। वहीं सरकारी स्कूल में शिक्षक, ब्लॉक अफसर समेत कई लोगों को परेशान करने भी आरोप हैं। विजिलेंस अब आराेपी से गहराई से पूछताछ करेगी। दूसरी तरफ अधिकारी आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। उनका कहना है कि झूठे केसों में फंसाया जा रहा है। याद रहे कि इससे पहले 25 अक्तूबर को मोहाली पुलिस ने एआईजी को गिरफ्तार किया था। उन पर विजिलेंस पूछताछ के दौरान डीएसपी वरिंदर सिंह से हाथापाई करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगे थे। वरिंदर सिंह की शिकायत पर ही उन्हें गिरफ्तार किया गया था।