सामान्य दिनों में पीजीआई की ओपीडी में 12 से 15 हजार मरीज प्रतिदिन आते हैं, जबकि जीएमसीएच-32 जीएमएसएच-16 को मिलाकर यह आंकड़ा 3 से 4 हजार का होता है। निजी अस्पतालों में भी प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीज ओपीडी में देखे जाते हैं। यानी चंडीगढ़ में 1 दिन में लगभग 20 से 22 हजार मरीजों को इलाज मिलता है। लॉकडाउन के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल के अलावा देश के अन्य शहरों से आने वाले हजारों मरीज इलाज के इंतजार में लॉकडाउन खुलने की राह देख रहे हैं।
निजी अस्पतालों में भी बस इमरजेंसी सेवा
लॉकडाउन के कारण सरकार के आदेश पर जब पीजीआई समेत जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की ओपीडी सेवा बंद की गई तो मरीजों ने निजी अस्पतालों का रुख करना शुरू कर दिया। ऐसी स्थिति में संक्रमण पर काबू के लिए आईएमए ने भी शहर के सभी निजी अस्पतालों में रूटीन सर्जरी और ओपीडी सेवा बंद कर दी। शहर में लगभग 25 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जहां महीने भर में 2 से ढाई हजार सर्जरी होती है। दो महीने से निजी अस्पतालों में भी केवल इमरजेंसी और ट्रॉमा केस ही देखे जा रहे हैं।
सामान्य दिनों में एक महीने की सर्जरी का आंकड़ा
अस्पताल इमरजेंसी और ट्रॉमा सर्जरी रुटीन सर्जरी
- पीजीआई 500 और 700 1400
- जीएमसीएच-32 300 900
- जीएमएसएच-16 150 600
- निजी अस्पताल 1500 2500
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ओपीडी और रुटीन सर्जरी बंद की गई है लेकिन मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए लगभग सभी डिपार्टमेंट की टेली कंसल्टेंट सुविधा शुरू कर दी गई है। इमरजेंसी केस में कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करते हुए तत्काल सर्जरी की जा रही है। -डॉ. जगतराम, पीजीआई, डायरेक्ट
ट्रामा इमरजेंसी के साथ ही गाइनी केस में सर्जरी पहले की ही तरह अब भी की जा रही है। जहां तक रूटीन और प्लान सर्जरी की बात है तो उसके मरीजों को दवा द्वारा आराम पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे उन्हें किसी प्रकार का दर्द न झेलना पड़े। -डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16
केस -1: हनुमानगढ़ (राजस्थान) निवासी 26 साल की सुनीता (बदला हुआ नाम ) को ब्रेस्ट कैंसर है। पिछले 7 महीने से पीजीआई में उनका इलाज चल रहा है। लॉकडाउन के कारण ढाई महीने से वह पीजीआई में इलाज कराने नहीं जा पा रही हैं, जबकि डॉक्टरों ने उन्हें मार्च में ही हर हाल में सर्जरी कराने की सलाह दी थी। ऐसी स्थिति में लगभग 2 महीने से ज्यादा समय निकल जाने के बाद सुनीता की परेशानी तेजी से बढ़ रही है। बीमारी में दर्द के कारण उनकी स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। इलाज के लिए वह फरवरी से चंडीगढ़ में एक रिश्तेदार के यहां आकर रुकी हुई हैं लेकिन रूटीन सर्जरी बंद होने के कारण उन्हें लॉकडाउन खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है।
केस-2: दिल्ली निवासी सुजीत कुमार (बदला हुआ नाम) की दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं। वह पिछले 9 महीने से डायलिसिस पर हैं। डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए कह दिया है। फरवरी में उन्होंने पीजीआई में इलाज शुरू कराया। उनकी माताजी उन्हें किडनी देने के लिए तैयार हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया बाधित हो गई है। ऐसी स्थिति में सुजीत को लगातार डायलिसिस कराना पड़ रहा है, जिसके साइड इफेक्ट से उनकी स्थिति गंभीर होती जा रही है। सुजीत का कहना है कि कोरोना के कारण उनका इलाज बीच में ही रुक गया है। अब एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है।