इसके बाद इस फैसले को हरियाणा सरकार ने चार फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हरियाणा सरकार ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। सीजेआई एनवी रमण की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मुझे 90 सेकंड सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और वैधानिक अधिनियम पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला संतोषजनक: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि निजी क्षेत्र में हरियाणा के युवाओं को 75 फीसदी आरक्षण दिए जाने के कानून पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के लिए संतोष का विषय है। शीर्ष अदालत ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर केस की नियमित सुनवाई करते हुए फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। सरकार को यह भी छूट दी है कि इस कानून से जुड़ी रजिस्ट्रेशन आदि की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
हरियाणवी युवाओं की हुई जीत: दुष्यंत चौटाला
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार कानून पर लगाई रोक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हटाने के फैसले का स्वागत किया। साथ ही खुशी जाहिर करते हुए इसे हरियाणवी युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में जीत बताया है। डिप्टी सीएम ने ट्वीट करते हुए कहा कि हम मंजिल नहीं चुनते रास्ते आसान देखकर, हम छोड़ते नहीं है कश्तियां तूफान देखकर। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हरियाणा के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई 75 प्रतिशत जॉब्स फॉर लोकल के मामले में हमारी फिर जीत हुई है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कानून पर लगे स्टे को हटा दिया है। वे सभी को विश्वास दिलाते हैं कि यह कानून सभी के हित में है और इस पर राजनीतिक मंशा से अड़ंगा नहीं लगाना चाहिए।
आखिरी बाधा हटी, रोजगार कानून लागू होने का रास्ता साफ: दिग्विजय चौटाला
जेजेपी प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला ने कहा कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के ध्येय, साफ नियत और दृढ़ निश्चय ने फिर कर दिखाया कि प्राइवेट नौकरियों में 75 प्रतिशत हरियाणवी आरक्षण कानून पर लगे स्टे को सुप्रीम कोर्ट ने हटाया। उन्होंने कहा कि आखिरी बाधा हटी और कानून के लागू होने का रास्ता साफ हुआ। दिग्विजय ने कहा कि इसके लिए समस्त हरियाणा वासियों, युवाओं को बहुत-बहुत बधाई और निरंतर युवाओं के हक की लड़ाई जारी रहेगी।