पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवाह ऑनलाइन पंजीकरण के आदेश को चुनौती देने वाली हरियाणा सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि आज के दौर में कानून का प्रौद्योगिकी के साथ चलना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश का 45 दिन के भीतर पालन करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया है।
गुरुग्राम निवासी अमी रंजन और उनकी पत्नी मिशा वर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था दोनों अलग-अलग देश में रहते हैं। अमी रंजन जहां लंदन में रहता है तो उनकी पत्नी मिशा वर्मा अमेरिका में कार्यरत है। याची ने बताया था कि उनका विवाह 2019 में गुरुग्राम में हुआ था। विवाह के बाद दोनों अपने-अपने कार्यस्थल के देश में चले गए।
अमी ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसे उसकी पत्नी से मिलने अमेरिका जाना था और इसके लिए जब वीजा आवेदन किया गया तो विवाह प्रमाणपत्र की मांग की गई। जब प्रमाण पत्र के लिए गुरुग्राम में विवाह प्रमाण पत्र अधिकारी को आवेदन किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें भौतिक रूप से पेश होना होगा और हस्ताक्षर करने होंगे। याची ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की बात कही तो अधिकारी ने इससे इनकार कर दिया। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी।
इसे खंडपीठ में चुनौती दी गई तो खंडपीठ ने याची के हक में फैसला सुनाया। खंडपीठ ने फैसले में कहा कि इस मामले में याची पेशी से छूट नहीं मांग रहे बल्कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांग रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि आज का दौर प्रौद्योगिकी का है और जब केस में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ जा सकता है तो विवाह पंजीकरण के लिए भी यह वैध है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी तथा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ हाईकोर्ट ने दोनों के विवाह पंजीकरण की अनुमति दे दी थी। हालांकि गवाहों के रूप में रिश्तेदारों की पंजीकरण के समय भौतिक मौजूदगी अनिवार्य रखी थी। हरियाणा सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर चुनौती दी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।