सुनील जाखड़ और नवजोत सिंह सिद्धू।
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पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नवजोत सिंह सिद्धू के ताजे रुख का विरोध किया। अब वह खुलकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में खड़े हैं। गुरुवार को सुनील जाखड़ ने ट्वीट किया कि बार-बार मुख्यमंत्री की अथॉरिटी को बेअसर करने की कोशिशें बंद होनी चाहिए। अब तो हद हो चुकी है, जिसे रोकना जरूरी हो गया है।
जाखड़ ने ट्वीट में लिखा- एजी और डीजीपी की नियुक्तियों के मुद्दे पर उठाए गए सवाल दरअसल, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की नेक नीयत और योग्यता पर सवालिया निशान लगाना है। इस मामले का अब एक बार में निपटारा हो जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि नवजोत सिद्धू ने इस्तीफा देने के बाद एडवोकेट जनरल और डीजीपी की नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं।
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यह क्रिकेट नहीं
इससे पहले सुनील जाखड़ ने कहा था कि यह सिर्फ क्रिकेट नहीं है! इस पूरे 'एपिसोड' में जिस बात से समझौता किया गया है, वह है कांग्रेस नेतृत्व द्वारा निवर्तमान पीसीसी अध्यक्ष (नवजोत सिंह सिद्धू ) पर विश्वास। कोई भी भरोसे के इस उल्लघंन को सही नहीं ठहरा सकता है।
जाखड़ को झेलना पड़ा था सिद्धू का विरोध
सुनील जाखड़ को दो बार नवजोत सिंह सिद्धू का विरोध झेलना पड़ा। जब बात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाने की थी तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुनील जाखड़ का नाम हाईकमान के सामने रखा था लेकिन बाजी नवजोत सिंह सिद्धू ने मार ली। बताया जाता है कि सिद्धू ने जाखड़ के नाम का विरोध किया था।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद सुनील जाखड़ का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे रहा है। सुनील जाखड़ सीएम बनते-बनते रह गए। इसकी वजह भी नवजोत सिंह सिद्धू रहे। विधायक दल की बैठक में जाखड़ के नाम पर सहमति बन गई थी लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू के विरोध के बाद उनका नाम इस रेस से बाहर कर दिया गया था।