इन्हें नजर नहीं आ रहा, पर वह नहीं चाहते कि किसी गलती से एलओपी पद सुखबीर को मिल जाए। उनके गुट के सात विधायक हैं, पर वह बेवजह उप चुनाव नहीं चाहते। मनीष सिसोदिया पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि बाकी सब लोग पद के लालच में आए थे, सिर्फ इन लोगों को पद नहीं चाहिए। केजरीवाल संविधान में संशोधन कर लगातार तीसरी बार कन्वीनर बने हैं, सीएम भी हैं।
चुनाव पर पीडीए लेगा फैसला
सुखपाल खैरा ने कहा कि पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस बन चुका है। जिसमें उनके गुट के अलावा लोक इंसाफ पार्टी, बसपा और डॉ. धरमवीर गांधी हैं। 11-12 को लुधियाना में मीटिंग है। जिसमें तय किया जाएगा कि लोकसभा चुनाव लड़ना है या नहीं और कितनी सीटों पर लड़ना है। लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब की सारी हमख्याली पार्टियों को एक प्लेटफार्म पर लाने की कवायद तेज की जाएगी।
सुखपाल खैरा ने भगवंत मान को चुनौती दी कि वह 20 को अरविंद केजरीवाल की रैली के दौरान मंच से बोलें कि वह माफी से सहमत हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि मान कहते हैं कि प्रधानगी से इस्तीफा दे दिया। फिर कहते हैं कि केजरीवाल से इस बारे में बात नहीं हुई। एक साल में वह केजरीवाल से पूछ ही नहीं सके कि बिक्रम मजीठिया से माफी क्यों मांगी या केजरीवाल ने जवाब नहीं दिया, या वह पंजाब के लोगों के साथ मसखरी कर रहे हैं। केजरीवाल कह चुके हैं कि उनकी दिन में दस बार मान से बात होती है।
दलबदल कानून पर हो बहस
सुखपाल खैरा ने कहा कि पहले कांग्रेस, फिर भाजपा ने एंटी डिफेक्शन लॉ में संशोधन किया। अलग पार्टी बनाने के लिए दो तिहाई के संख्याबल की शर्त बना दी। यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। इसके चलते पार्टी प्रधान तानाशाह बन गए, पार्टियों में लोकतंत्र खत्म हो गया। सुखबीर बादल के पास करोड़ों की पार्टी प्रॉपर्टी और फंड हैं, पर न दो तिहाई लोग इकट्ठे होंगे, न उनसे कोई मांग सकेगा। इस मुद्दे पर गंभीर बहस की जरूरत है।