फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रंधावा व सिद्धू में बढ़ा मनमुटाव: डिप्टी सीएम ने अब नवजोत को मजीठिया मामले में मुंह बंद रखने की दी नसीहत

Tue, 04 Jan 2022 12:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब कांग्रेस में नेताओं के बीच तल्खी बढ़ने का मामला अभी थम नहीं रहा है। अब डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा व नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मनमुटाव बढ़ गया है। रंधावा ने गृह विभाग छोड़ने तक की भी पेशकश कर दी है। वहीं बिक्रम मजीठिया मामले में रंधावा ने सिद्धू को न बोलने की नसीहत दी है।
विज्ञापन
नवजोत सिंह सिद्धू और सुखजिंदर सिंह रंधावा। - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब के गृहमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सिद्धू को अब बिक्रम सिंह मजीठिया मामले में मुंह बंद रखने की नसीहत दी है। चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में सोमवार को बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सिद्धू को पहले भी हिदायत दी थी और अब भी कह रहे हैं कि उनको इस मामले में अपनी जुबान बंद रखनी चाहिए, क्योंकि पूरा मामला कोर्ट में है। सिद्धू को ऐसे बयान नहीं देना चाहिए जिससे यह लगे कि मजीठिया के मामले में सरकार कोई बदले की कार्रवाई कर रही है।

विज्ञापन


रंधावा व सिद्धू के बीच मनमुटाव बढ़ गया है। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जब से गृह मंत्री बने हैं, तभी से सिद्धू उनके प्रति कुछ नाराजगी पाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह नहीं समझ पा रहे हैं कि सिद्धू को उनसे क्या समस्या है। सिद्धू के परिवार से उनके पुराने रिश्ते हैं फिर भी गृहमंत्री बनने के बाद से सिद्धू उनसे नाराज हैं। रंधावा ने कहा कि अगर सिद्धू गृह विभाग चाहते हैं तो मैं यह पद छोड़ने को तैयार हूं।

मजीठिया पंजाब में नहीं लेकिन भारत में ही हैं
रंधावा ने सोमवार को दावा किया कि ‘फरार’ बिक्रम सिंह मजीठिया पंजाब में नहीं हैं लेकिन देश में ही हैं। वीडियो और तस्वीरें फर्जी हैं। अगर उन्हें पंजाब में कहीं भी देखा गया तो वह कुछ ही मिनटों में जेल पहुंच जाएंगे।’ रंधावा ने यह भी कहा कि पुलिस मजीठिया की तलाश कर रही है और कानून के अनुसार मजीठिया को फरार घोषित कर दिया गया है। चूंकि उनके पास कोई सरकारी सुरक्षा नहीं है, इसलिए यह कहना गलत है कि पुलिस उनके ठिकाने को जानती है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत गंभीर हैं, आप किसी भी कानूनी विशेषज्ञ से पूछ सकते हैं।’

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें